मरवाही वनमंडल बना भ्रष्टाचार का अड्डा? DFO मौन, तस्करी जारी—ग्रीन क्रेडिट योजना में करोड़ों की गड़बड़ी के संकेत

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के मरवाही वनमंडल में एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व में पदस्थ रहे डीएफओ और अधिकारियों—आर.के. मिश्रा, संजय त्रिपाठी, दिनेश पटेल, शशि कुमार और रौनक गोयल—पर गबन और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगने के बाद भी जांच का सिलसिला जारी है।
इसी बीच शासन ने नए आईएफएस अधिकारी गृष्मी चाँद को मरवाही का डीएफओ नियुक्त किया था, जिससे पारदर्शिता और सुधार की उम्मीद जगी थी। लेकिन हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।
DFO पर गंभीर आरोप:
वर्तमान डीएफओ पर शिकायतों को नजरअंदाज करने और लकड़ी तस्करी जैसे मामलों में “मूकदर्शक” बने रहने के आरोप लग रहे हैं। आम जनता और स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि कहीं तस्करों को संरक्षण तो नहीं मिल रहा?
प्रशासनिक क्षमता पर सवाल:
आरोप है कि वनमंडल में फैसले कुछ चुनिंदा विवादित कर्मचारियों के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। तत्कालीन CCF प्रभात मिश्रा द्वारा नियमों को दरकिनार कर वरिष्ठ लिपिक आर.एस. भदौरिया को हटाकर शैल गुप्ता को पदोन्नति देने और हेड क्लर्क बनाने का मामला भी चर्चा में है।
गबन की आशंका:
बताया जा रहा है कि यदि शैल गुप्ता के कार्यकाल में जारी धनादेशों और भुगतानों की निष्पक्ष जांच हो, तो करोड़ों रुपये के गबन का खुलासा हो सकता है।
ग्रीन क्रेडिट योजना में गड़बड़ी:
सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन क्रेडिट योजना भी मरवाही में सवालों के घेरे में है।
70% तक प्लांटेशन फेल बताए जा रहे हैं
पानी और सुरक्षा (बेरिकेटिंग) की व्यवस्था नदारद
कागजों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर
जांच की मांग:
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने मिलकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है और आपस में बंदरबांट कर ली गई है। पूरे मामले की EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) से जांच कराने की मांग तेज हो गई है।


