कुरकुट नदी में दो हाथी शावकों के शव मिलने से हड़कंप:ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तीन संदिग्ध हिरासत में — मौत के कारणों पर सस्पेंस

घरघोड़ा(छत्तीसगढ़ उजाला)-कुरकुट नदी में आज दोपहर दो हाथी शावकों के शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और नदी से दोनों शावकों के शव निकलवाए। इस मामले में संदेह के आधार पर तीन ग्रामीणों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
ग्रामीणों ने दी सूचना, मौके पर पहुंचा वन अमला
मिली जानकारी के अनुसार घरघोड़ा रेंज के कुरकुट नदी में गांव के लोगों ने दो हाथी शावकों के शव पड़े होने की सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नदी से शव बाहर निकलवाकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से घरघोड़ा रेंज के चारमार बीट क्षेत्र में लगभग 19 हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा था। आशंका जताई जा रही है कि मृत दोनों शावक इसी दल के सदस्य थे।
मौत के कारणों पर सस्पेंस, पीएम रिपोर्ट का इंतजार
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में अभी तक हाथी शावकों की मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है।
सोलर फेंसिंग के एंगल से भी जांच
जिस स्थान पर हाथी शावकों के शव मिले हैं, वहां आसपास कुछ किसानों द्वारा खेतों की सुरक्षा के लिए सोलर पैनल फेंसिंग लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी आधार पर वन विभाग ने तीन संदिग्ध ग्रामीणों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं करंट या फेंसिंग की वजह से तो हाथियों की मौत नहीं हुई।
हाथियों की सुरक्षा पर क्यों उठ रहे सवाल?
इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हर साल हाथियों के संरक्षण और प्रबंधन के नाम पर अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं, इसके बावजूद हाथियों की लगातार हो रही मौतें चिंताजनक हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े बजट और योजनाओं के बावजूद हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही है?
सरकार और जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर भी सवाल
दो मासूम हाथी शावकों की मौत के बाद भी अभी तक सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है। वन्यजीव संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली व्यवस्था पर अब यह घटना गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
क्या इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी जांच और रिपोर्टों के बीच दबकर रह जाएगा?




