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रायपुर में “विकसित भारत एवं सतत विकास” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: समावेशी विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैल्यू एडिशन पर जोर


रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-“विकसित भारत एवं सतत विकास : अवसर और चुनौतियाँ” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ संभागायुक्त रायपुर संभाग महादेव कावरे द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समावेशी, सतत एवं क्षेत्रीय संतुलित विकास अत्यंत आवश्यक है। विशेष रूप से पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों पर केंद्रित योजनाओं के माध्यम से ही विकास को वास्तविक गति दी जा सकती है।
उन्होंने अवसंरचना विकास, कौशल उन्नयन और सामुदायिक सहभागिता को विकास के तीन प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि इन प्रयासों से अविकसित क्षेत्रों को विकास के केंद्र में परिवर्तित किया जा सकता है। जशपुर के पूर्व कलेक्टर के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जिले में चाय बागानों को प्रोत्साहन देने से स्थानीय उत्पादकों और लघु किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इससे न केवल सतत आजीविका के अवसर बढ़े, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की बढ़ती ताकत
संगोष्ठी के तकनीकी सत्र की शुरुआत प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. अश्विनी महाजन के वक्तव्य से हुई। उन्होंने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि कुछ विकसित राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बनाने का प्रयास करती हैं, लेकिन भारत अपनी तकनीकी क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता के आधार पर सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की सराहना करते हुए कहा कि इसने भारत को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है और वित्तीय समावेशन को नई दिशा प्रदान की है।
2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला ने की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और प्राचीन काल में भी ज्ञान, विज्ञान, व्यापार और संस्कृति का वैश्विक केंद्र रहा है। उन्होंने युवाओं और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका को विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक बताया।
खनिज-आधारित विकास मॉडल पर पुनर्विचार की जरूरत
प्रोफेसर के.बी. दास ने झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों की खनन-आधारित औद्योगिक संरचना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल कच्चे खनिजों के उत्खनन और निर्यात पर आधारित विकास मॉडल दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है।
उन्होंने वैल्यू एडिशन, डाउनस्ट्रीम उद्योगों और फिनिश्ड उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे स्थायी आर्थिक विकास के साथ व्यापक रोजगार सृजन सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास का संबंध
सत्र के समापन अवसर पर डॉ. पी.के. घोष ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के परस्पर संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि सशक्त रक्षा व्यवस्था किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला होती है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, ताकि आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिल सके।
समावेशी विकास ही विकसित भारत की कुंजी
संगोष्ठी का समापन प्रश्नोत्तर और सार्थक चर्चा के साथ हुआ। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि समावेशी विकास, तकनीकी उन्नति, औद्योगिक वैल्यू एडिशन और सुदृढ़ रक्षा प्रणाली ही विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य तत्व हैं।
यह संगोष्ठी विकसित भारत की दिशा में ठोस विमर्श और नीतिगत सोच को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच साबित

प्रशांत गौतम

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