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*फर्जी जाति वाले कटारे पर मेहरबान सरकार ?…..* *जांच की अनुमति की फाइल अब तक क्यो है लापता……* *शासन की अनुमति के इंतजार में जांच एजेंसी…….*

छत्तीसगढ़ उजाला रायपुरः

प्रधान मंत्री सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) में मुख्य अभियंता के के कटारे के खिलाफ ईओडब्ल्यू और एसीबी में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत दर्ज की गई है। इसमें उल्लेख किया गया है कि कटारे के पास लगभग 2,000 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति और शेयर मार्केट में निवेश है।इस मामले को लेकर अब सरकार भी कटघरे में खड़ी होती नजर आ रही है।ईओडब्ल्यू ने 26 दिसंबर 2024 को राज्य सरकार को पत्र लिखकर जांच के लिए अनुमोदन मांगा था, लेकिन 14 माह बीत जाने के बाद भी फाइल धूल खा रही है और जांच की अनुमति नहीं मिल सकी है।आखिर इस खेल में सरकार के किस मंत्री और नौकरशाह शामिल है।जो ऐसे धूर्त और भ्रष्टाचारी अधिकारी को बचाने का खेल कर रहे है।विभागीय मंत्री को ऐसे मामले पर अपना ध्यान आकर्षित करने की जरूरत है।ऐसे मामलों में विपक्षी दल छत्तीसगढ़ में नजर ही नही आता है।गलियारों में चर्चा है कि सूबे के एक पॉवर फूल मंत्री का इस अधिकारी को वरदहस्त प्राप्त है।लगता है इस मामले को भीपुराने कई मामलों की तरह आखिरकार दबा दिया जाएगा।

शिकायत में काफी सारे आरोप लगाये गए पर अब तक सरकार आंख मूंदकर बैठी हुई है।जब जांच एजेंसी को कार्रवाही करने की अनुमति ही नही देना है तो फिर यह नाटक नौटंकी किस लिए है।eow और acb को बिना पॉवर दिए काम करने का खेल क्यो किया जा रहा है।इस मामले को लेकर एक रिटायर्ड आईपीएस अफसर ने छत्तीसगढ़ उजाला की टीम को बताया कि सब सेटिंग का खेल है।eow और acb में प्रदेश के बहुत से अफसरों का मामला पेंडिंग है।शासन उन अफसरों की जांच की अनुमति की फाइल को अटका कर रखा हुआ है।ऐसे मामलों में सरकार को तत्काल अनुमति देनी चाहिये ।इससे सरकार की अच्छी इमेज बनेगी।ऐसी स्थिति में जांच एजेंसी कुछ नही कर सकती।जांच एजेंसी को और पॉवर देने को लेकर सरकार को  विचार करना चाहिए।

पीएमजीएसवाई कार्यालय का धूर्त अफसर….. कटारे….

गया है कि कटारे ने को दौरान कागजों में प्रशि शासन को लाखों रुपये पहुंचाया। उन पर भ्रष्टाचार के माध्यम से अकूत संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।शिकायत में जमीनों, आलीशान मकान के गंभीर आरोप है। शिकायत में करोड़ों के बेनामी संपत्तियों के साथ ही शेयर में बड़ा पैसा लगाने का भी जिक्र है। ईओडब्ल्यू ने मामले को देखते हुए प्रकरण दर्ज करने की तैयारी की थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत किसी भी राजपत्रित अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करने के लिये उस अधिकारी के मूल विभाग या राज्य सरकार से अनुमति लेनी जरूरी है।साल भर से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अब तक इस भ्र्ष्टाचार में लिप्त अधिकारी के खिलाफ शासन से अनुमति नही मिली है।

कटारे का जाति प्रमाण पत्र जांच में पूरी तरह से फर्जी पाया गया है।ऐसे भ्र्ष्टाचार में लिप्त अफसर को सरकार में किस मंत्री और नौकरशाह की कृपा मिली हुई है।सरकार को इस मामले पर मनन करने की आवश्यकता है।सुशासन को चरितार्थ करने का समय आ चुका है।सूबे के मुखिया को कटारे जैसे माह भ्रष्ट अधिकारी के ऊपर कड़ी कार्रवाही करने की जरूरत है।अब सरकार इस मामले में क्या फैसला करेगी यह तो सभी समझते है।

Anil Mishra

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