*महिला सब इंजीनियर ने जिला पंचायत सीईओ पर लगाया प्रताड़ना और गलत संलग्निकरण का आरोप फेसबुक पर भावुक पोस्ट कर उठाए गंभीर सवाल, RTI का जवाब नहीं मिलने का दावा*
छत्तीसगढ़ उजाला

महिला अफसर का फूटा गुस्सा! RES की सब इंजीनियर ने खोला मोर्चा, जिला पंचायत सीईओ पर प्रताड़ना और राजनीतिक दबाव का आरोप
मुंगेली (छत्तीसगढ़ उजाला)। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक संवेदनशील मामला सामने आया है। डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह जिले में पदस्थ एक महिला सब इंजीनियर ने अधिकारियों पर प्रताड़ना और नियम विरुद्ध संलग्निकरण का आरोप लगाया है।
RES विभाग में कार्यरत महिला सब इंजीनियर सोनल जैन ने जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय और अन्य अधिकारियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपने फेसबुक अकाउंट पर कई भावुक पोस्ट साझा की हैं, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई हैं।
बिना ठोस कारण के संलग्निकरण का आरोप
सोनल जैन का आरोप है कि उन्हें जनपद पंचायत मुंगेली से हटाकर RES डिवीजन कार्यालय मुंगेली में संलग्न कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई बिना किसी स्पष्ट आधार और प्रक्रिया का पालन किए की गई।
महिला अधिकारी के मुताबिक, जब उन्होंने इस आदेश के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की तो उन्हें मौखिक रूप से बताया गया कि उनके खिलाफ “राजनीतिक दबाव” है, जिसके चलते यह निर्णय लिया गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी अधिकारी की ओर से लिखित रूप में कुछ नहीं दिया गया।
विरोध करने पर प्रताड़ना का आरोप
सोनल जैन ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध किया तो उन्हें अलग-अलग माध्यमों से राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि मैसेज और अन्य तरीकों से उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा पोस्ट में इसे “असंवैधानिक और नियम विरुद्ध” बताते हुए लिखा कि एक महिला अधिकारी होने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
सूचना के अधिकार का जवाब नहीं मिलने का दावा
मामले को लेकर महिला सब इंजीनियर ने RTI के माध्यम से अपने संलग्निकरण से संबंधित दस्तावेज और कारणों की जानकारी मांगी। उनका दावा है कि विभाग की ओर से अब तक उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

सोनल जैन ने फेसबुक पर शासन द्वारा जारी संलग्निकरण आदेश की प्रति भी साझा की है और कहा है कि वे इस मामले में न्यायालय का रुख अपनाने पर विचार कर रही हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और महिला सम्मान को लेकर सरकार लगातार अपनी प्रतिबद्धता जताती रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह जिले से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि अब तक जिला प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या?
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कराता है या नहीं, और यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है। वहीं, महिला सब इंजीनियर द्वारा न्यायालय जाने की तैयारी से मामला कानूनी रूप भी ले सकता है।



