देवरी कला धान केंद्र में वसूली का खुलासा, वीडियो वायरल — अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? पूर्व प्रबंधक की वापसी पर उठे गंभीर सवाल

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़ उजाला)
जिले के देवरी कला धान खरीदी केंद्र से जुड़ा कथित अवैध वसूली का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। किसानों से धान खरीदी के दौरान ‘कट’ लेने के आरोप, वायरल वीडियो, इस्तीफे के बाद दोबारा पदभार और अब तक FIR दर्ज न होने की स्थिति—इन सबने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
किसानों के आरोप: तौल और भुगतान में ‘कट’?
स्थानीय किसानों का आरोप है कि धान तौल और भुगतान प्रक्रिया के दौरान उनसे प्रति क्विंटल या प्रति बोरी अतिरिक्त रकम ली गई। कुछ किसानों का दावा है कि रकम न देने पर उनकी उपज की तौल में देरी की जाती थी या तकनीकी आपत्तियाँ लगाई जाती थीं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या दर्ज शिकायतों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में धान खरीदी केंद्र परिसर के भीतर एक व्यक्ति किसानों से पैसे लेते दिखाई देता है। बताया जा रहा है कि यह केंद्र आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, देवरी कला के अधीन संचालित है।
सूत्रों के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाला व्यक्ति कोटमी निवासी विकास गुप्ता उर्फ विक्की बताया जा रहा है। उस पर प्रति बोरी ‘कट’ वसूलने का आरोप है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि सार्वजनिक नहीं की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है:
खरीदी केंद्र के भीतर बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी कैसे संभव हुई?क्या यह प्रबंधन की जानकारी के बिना हो सकता था?
यदि नहीं, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही?
इस्तीफे के बाद पुनः पदभार, विवाद और गहरा
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह जानकारी सामने आई कि वर्ष 2024-25 की धान खरीदी के दौरान सोसायटी प्रबंधक चंद्रकांत सलाम ने कथित रूप से व्हाट्सएप के माध्यम से कलेक्टर और सहायक पंजीयक को इस्तीफा भेजा था।
सूत्रों के मुताबिक, लगभग 9 महीने बाद उन्हें पुनः उसी सोसायटी में पदस्थ कर दिया गया। यह निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया, इस पर अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि आरोप गंभीर थे, तो जांच पूरी होने तक पुनर्नियुक्ति क्यों की गई?
जांच हुई, लेकिन FIR पर सन्नाटा
कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार, फूड इंस्पेक्टर और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने जांच की। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर अनियमितता के संकेत मिले हैं।
इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि वीडियो और जांच दोनों मौजूद हैं, तो कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों?
सेवा समाप्ति या औपचारिकता?
फड़ प्रभारी सचिन राठौर की सेवा समाप्ति की चर्चा भी सामने आई, लेकिन स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि वे अभी भी कार्य करते देखे जा रहे हैं।
यदि यह सही है, तो यह सवाल उठता है:
क्या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?क्या निचले स्तर पर कार्रवाई दिखाकर बड़े सवालों से ध्यान हटाया जा रहा है?
इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
प्रशासन की चुप्पी, बढ़ता असंतोष
मामले को लेकर प्रशासन की ओर से अब तक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है। इससे किसानों और स्थानीय नागरिकों में असंतोष देखा जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों की स्पष्ट पहचान और दोष सिद्ध होने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
क्या वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी?
क्या संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट कर FIR दर्ज की जाएगी?
पुनः पदस्थापना के निर्णय पर प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देगा?
क्या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
धान खरीदी व्यवस्था किसानों की आर्थिक रीढ़ मानी जाती है। यदि इसी व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह केवल एक केंद्र का मामला नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय बन जाता है।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
किसान जवाब चाहते हैं — और पारदर्शिता




