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“बैकुण्ठपुर में शासकीय जमीन घोटाले के आरोप, बंदरबांट में राजस्व अमला–रजिस्टार की भूमिका संदिग्ध”


बैकुण्ठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)
बैकुण्ठपुर तहसील अंतर्गत ग्राम आनि सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शासकीय भूमि की खुलेआम खरीदी–बिक्री, अवैध कब्जे और नियमों को ताक पर रखकर किए गए नामांतरण के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जहां जिला मुख्यालय में शासकीय भवनों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होने का रोना रोया जाता है, वहीं दूसरी ओर शासकीय भूमि की रजिस्ट्री कर निजी निर्माण धड़ल्ले से होते नजर आ रहे हैं।
इस पूरे खेल की जानकारी यदि किसी विभाग को सबसे बेहतर होनी चाहिए तो वह स्वयं राजस्व विभाग है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है।
खसरा नंबर 993 बना घोटाले की जड़
जानकारी के अनुसार ग्राम आनि में खसरा नंबर 993, जो शासकीय मद “छोटे झाड़ के जंगल” के अंतर्गत दर्ज है, उसकी बाकायदा रजिस्ट्री कर दी गई। जबकि नियमों के अनुसार शासकीय भूमि की न तो चौहद्दी बनाई जा सकती है और न ही उसकी वैध रजिस्ट्री संभव है।
चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2022 में इस शासकीय भूमि की चौहद्दी बनाई गई, जबकि उस समय भी ऐसे किसी प्रावधान का अस्तित्व नहीं था। बड़ा सवाल यह उठता है कि शासकीय भूमि की चौहद्दी आखिर किस आदेश और किसके संरक्षण में बनाई गई? और फिर रजिस्ट्री किस आधार पर कर दी गई?
नामांतरण निरस्त… फिर बहाल!
सूत्रों के मुताबिक इस भूमि का नामांतरण एक बार निरस्त भी किया गया था, लेकिन बाद में उसे पुनः बहाल कर दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम राजस्व प्रक्रिया की पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सलबा–सलका में भी खेल, फर्जी आदेश की कोशिश
इसी तरह सलबा/सलका क्षेत्र में एक शासकीय कर्मचारी के नाम पर शासकीय भूमि की खरीदी का मामला सामने आया, जहां कथित रूप से फर्जी अनुमति आदेश तैयार कर भूमि की बिक्री और नामांतरण कराने का प्रयास किया गया। हालांकि इस मामले में भू-माफियाओं और राजस्व अमले की चाल इस बार सफल नहीं हो सकी और नामांतरण निरस्त कर दिया गया।
शिकायतें दबाने का आरोप
जिले में ऐसे कई प्रकरण हैं जिनकी लिखित शिकायतें खसरा नंबर सहित संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में आज तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि कई शिकायतों को या तो भू-माफियाओं से सांठ-गांठ कर दबा दिया गया, या फिर पटवारियों द्वारा घुमावदार प्रतिवेदन बनाकर उन्हें “निराधार” घोषित कर दिया गया।
रजिस्टार की भूमिका भी संदिग्ध
शासकीय भूमि की रजिस्ट्री के मामलों में रजिस्टार, बैकुण्ठपुर की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
मौजूदा हालात यह साफ संकेत देते हैं कि शासकीय भूमि की सुरक्षा और संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय जांच अनिवार्य हो चुकी है। साथ ही दोषी अधिकारी–कर्मचारियों पर कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में शासकीय संपत्तियों की इस तरह की बंदरबांट पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

प्रशांत गौतम

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