शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण का अवैध खेल जारी
शासन के आदेश बेअसर, राजस्व दफ्तरों में भ्रष्टाचार बेलगाम

बैकुण्ठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 5 जुलाई 2025 से सभी प्रकार के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) समाप्त किए जाने के स्पष्ट और सख्त आदेश के बावजूद कोरिया जिले में शिक्षा विभाग के संलग्नीकरण का खेल बेखौफ जारी है। हालात यह हैं कि जिले के कई महत्वपूर्ण राजस्व कार्यालय आज भी शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों के सहारे चलाए जा रहे हैं, जिससे न केवल शासनादेश की अवहेलना हो रही है, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार बैकुण्ठपुर तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय बैकुण्ठपुर, सोनहत तहसील कार्यालय एवं सोनहत एसडीएम कार्यालय में बड़ी संख्या में शिक्षा विभाग के शिक्षक व कर्मचारी वर्षों से संलग्न हैं। नियमों के विरुद्ध चल रही यह व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दे रही है।
“खर्चा-पानी” के बिना नहीं होता काम
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, जाति व निवास प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक कार्य बिना लेन-देन के आगे नहीं बढ़ते। कार्यालयों में पेशी के नाम पर आम नागरिकों से खुलेआम “खर्चा-पानी” की मांग की जाती है, जिससे जनता को मानसिक, आर्थिक और प्रशासनिक शोषण झेलना पड़ रहा है।
स्कूलों से नदारद शिक्षक, दफ्तरों में जमे कर्मचारी
सूत्रों का दावा है कि संलग्नीकरण के जरिए कई शिक्षा विभाग के कर्मचारी प्रभावशाली पदों पर वर्षों से जमे हुए हैं। ये न तो नियमित रूप से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और न ही राजस्व विभाग के मूल कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। नतीजतन, शासन के आदेश फाइलों तक सीमित होकर रह गए हैं।
शासनादेश की खुली अवहेलना
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने साफ तौर पर कहा था कि संलग्नीकरण से कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, इसलिए इसे पूर्णतः समाप्त किया जाए। इसके बावजूद कोरिया जिले में आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
अब बड़ा सवाल
क्या जिला प्रशासन शासन के निर्देशों का पालन करते हुए अवैध संलग्नीकरण समाप्त करेगा?
या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा और आम जनता भ्रष्टाचार की चक्की में पिसती रहेगी?




