धान खरीदी के नाम पर उगाही!
देवरी कला केंद्र का वीडियो वायरल, क्या “चंद्रकांत सलाम” पर कार्रवाई से बच रहा है प्रशासन?

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही (छत्तीसगढ़ उजाला)
छत्तीसगढ़ में सुशासन के दावों के बीच गौरेला–पेंड्रा–मरवाही जिले के देवरी कला धान खरीदी केंद्र से सामने आया कथित उगाही कांड प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। किसानों से अवैध वसूली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप तो मचा, लेकिन अब तक की कार्रवाई अधूरी और संदिग्ध नजर आ रही है।
कैमरे में कैद उगाही, फिर भी सख्त कार्रवाई क्यों नहीं?
वायरल वीडियो में धान खरीदी केंद्र परिसर के भीतर किसानों से खुलेआम पैसे लेते हुए एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह केंद्र आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, देवरी कला के अधीन संचालित है।
सूत्रों के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाला व्यक्ति कोटमी निवासी विकास गुप्ता उर्फ विक्की है, जो किसानों से कथित रूप से प्रति बोरी ‘कट’ वसूलता दिख रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
धान खरीदी केंद्र के भीतर एक बाहरी व्यक्ति की एंट्री कैसे हुई?
क्या यह बिना प्रबंधन की जानकारी के संभव था?
यदि नहीं, तो जिम्मेदारी किसकी है?
समिति प्रबंधन पर संगठित सिंडिकेट के आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि समिति प्रबंधन से जुड़े लोगों ने एक संगठित नेटवर्क बनाकर उगाही का तंत्र खड़ा किया। आरोपों के केंद्र में समिति प्रबंधन से जुड़े चंद्रकांत सलाम का नाम भी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि उनकी जानकारी या संरक्षण के बिना केंद्र परिसर में इस तरह की गतिविधि संभव नहीं थी।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।
जांच में पुष्टि, पर FIR पर सन्नाटा
कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार, फूड इंस्पेक्टर और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम ने जांच की। सूत्रों के मुताबिक:अवैध वसूली के संकेत मिले,प्रथम दृष्टया अनियमितता की पुष्टि हुई,इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज न होना कई सवाल खड़े करता है। यदि वीडियो साक्ष्य और जांच रिपोर्ट मौजूद है, तो फिर कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों?
दिखावे की कार्रवाई या असली दोषियों पर पर्दा?
जानकारी मिल रही है कि फड़ प्रभारी स्तर पर औपचारिक कार्रवाई की बात कही जा रही है। लेकिन किसानों का आरोप है कि:केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है,असली जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही
पूरा मामला कागजों में निपटाने की कोशिश की जा रही है
यदि यह संगठित उगाही थी, तो क्या केवल एक-दो कर्मचारियों पर कार्रवाई से न्याय होगा?
किसानों का गुस्सा: “सेवा केंद्र या उगाही केंद्र?”
देवरी कला और आसपास के गांवों के किसानों में भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है:“धान बेचने आए थे, लेकिन हर बोरी पर कट मांगा जा रहा था। यह सेवा केंद्र है या उगाही केंद्र?”
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त धाराओं में FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
अब जिले के सामने बड़े सवाल
FIR कब दर्ज होगी?
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
क्या प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव में कार्रवाई रुकी है?
क्या पूरे कथित नेटवर्क पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
धान खरीदी व्यवस्था किसानों की आर्थिक रीढ़ है। यदि इसी प्रणाली में भ्रष्टाचार घर कर जाए, तो यह केवल एक केंद्र का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है।
अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
किसान जवाब चाहते हैं — और जनता भी।



