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जल जीवन मिशन घोटाला: 900 करोड़ की लूट में बड़ा एक्शन, रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल पर शिकंजा तेज


जयपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े कथित 900 करोड़ रुपये के घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई तेज कर दी है। 15 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुए पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल जांच के दायरे में हैं और सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े खुलासे और गिरफ्तारियां संभव हैं।
15 ठिकानों पर छापेमारी, 9 वरिष्ठ अधिकारी गिरफ्तार
ACB ने जयपुर, बाड़मेर, दिल्ली, बिहार और झारखंड समेत 15 स्थानों पर एक साथ दबिश दी। अब तक नौ वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसी टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की परतें खोल रही है।
इन अधिकारियों के नाम आए सामने
चीफ इंजीनियर (प्रशासन) दिनेश गोयल
चीफ इंजीनियर (ग्रामीण) केडी गुप्ता
अतिरिक्त मुख्य अभियंता शुभांशु दीक्षित
वित्तीय सलाहकार सुशील शर्मा
मुख्य अभियंता नीरिल कुमार
निलंबित एक्सईएन विशाल सक्सेना
रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव
रिटायर्ड मुख्य अभियंता डी.के. गौड़
रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी
इन सभी से पूछताछ जारी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
पांच सितारा होटल से हिरासत
पीएचईडी विभाग के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल को उदयपुर स्थित पांच सितारा होटल ताज लेक पैलेस से तड़के हिरासत में लिया गया। ACB को उनकी लोकेशन मिलने के बाद टीम होटल पहुंची और 17 फरवरी की सुबह करीब 4 बजे उन्हें डिटेन कर जयपुर ले जाया गया। बताया जा रहा है कि वे एक कथित कॉन्ट्रेक्टर द्वारा आयोजित बैठक में शामिल होने पहुंचे थे।
रेलवे स्टेशन से फिल्मी अंदाज में गिरफ्तारी
बाड़मेर में जोधपुर PHED में तैनात एक्सईएन विशाल सक्सेना को रेलवे स्टेशन से उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वे विरात्रा माता के दर्शन के लिए पहुंचे थे। सुबह 5 बजे ट्रेन से उतरते ही ACB की टीम ने उन्हें दबोच लिया और जयपुर ले जाया गया।
फर्जी प्रमाणपत्रों से 960 करोड़ के ठेके
जांच में सामने आया है कि टेंडर प्रक्रिया में फर्जी अनुभव प्रमाणपत्रों के आधार पर करीब 960 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए। आरोप है कि इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से जारी फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को निविदाएं दिलाई गईं।
कई परियोजनाओं में घटिया पाइप लगाने और अधूरे कार्यों का भुगतान करने के भी आरोप हैं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
139 इंजीनियर जांच के घेरे में
इस केस में 15 एक्सईएन, 40 एईएन और 50 जेईएन सहित कुल 139 इंजीनियर ACB के रडार पर हैं। एजेंसी का मानना है कि यह घोटाला संगठित स्तर पर अंजाम दिया गया और इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत रही।
जल जीवन मिशन, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, उसी योजना में भ्रष्टाचार के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

प्रशांत गौतम

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