
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में सहायक ग्रंथपाल के पद पर हुई नियुक्ति को लेकर मामला अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। इस नियुक्ति को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
याचिकाकर्ता कुंद झा, जो वर्तमान में सहायक ग्रंथपाल के पद पर कार्यरत हैं, ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी विज्ञापन के तहत संपन्न भर्ती प्रक्रिया को मनमाना और नियमविरुद्ध बताया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुणाल गौरव का चयन यूजीसी रेगुलेशन-2018 और संविधान के अनुच्छेद 14 के प्रावधानों के विपरीत किया गया है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और एकेडमिक स्कोर चयनित अभ्यर्थी से बेहतर होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किया गया। ऐसे में वर्तमान नियुक्ति को निरस्त कर यूजीसी नियमों के अनुरूप पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पुनः चयन प्रक्रिया अपनाने की मांग की गई है।
बताया गया कि इस संबंध में 29 दिसंबर 2025 को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को विस्तृत शिकायत सौंपी गई थी, जो अब तक लंबित है। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि यदि आवेदन लंबित है तो उस पर नियमानुसार विचार करने में कोई आपत्ति नहीं है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को निर्देशित किया है कि 29 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत अभ्यावेदन पर आदेश की प्रति प्राप्त होने के चार सप्ताह के भीतर विधिसम्मत निर्णय लिया जाए।
अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवालों का समाधान किस दिशा में जाता




