गौरेला पेंड्रा मरवाही

कुढ़कई पंचायत के सचिव संतराम पर मेहरबानी क्यों? घोटालों का अंबार, फिर भी कार्रवाई नहीं!


कुढ़कई पंचायत में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत सचिव संतराम पर लगातार आरोप लगने के बावजूद अधिकारी अब तक मौन हैं — आखिर क्यों?

जी. पी. एम.-(छत्तीसगढ़ उजाला)-स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जहाँ भी सचिव संतराम की पदस्थापना हुई, वहाँ घोटाले और विवाद पीछे-पीछे चल पड़े। कुढ़कई पंचायत में भी यही कहानी दोहराई जा रही है। पंचायत भवन में शराब सेवन करते हुए उनका वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद लोगों ने कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन मामला आज तक ठंडे बस्ते में पड़ा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव संतराम ने पशु पंजीयन से लेकर निर्माण कार्यों तक, हर योजना में अपने चहेते ठेकेदारों को काम दिलाया और कमीशनखोरी की परंपरा को खुलेआम बढ़ावा दिया। पंचायत में हुए अधिकांश निर्माण कार्य गुणवत्ता हीन हैं, जिनकी शिकायतें कई बार ऊपर तक पहुंचाई गईं, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सचिव संतराम इसी पंचायत के निवासी हैं, और उनका ससुराल भी इसी क्षेत्र में स्थित है। बावजूद इसके, उन्हें उसी पंचायत में पदस्थ किया गया, जिससे निष्पक्ष कार्यशैली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पदस्थापना “हितों के टकराव” (Conflict of Interest) का साफ उदाहरण है।

लोगों का आरोप है कि संतराम अपनी ऊँची पकड़ और राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर हर बार जांच से बच निकलते हैं। अब ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराए और पंचायत के कार्यों की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

ग्रामीणों का सीधा सवाल: “क्या भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह जाएगी या कुढ़कई पंचायत में सचमुच सफाई होगी?

प्रशांत गौतम

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