*छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय: तत्कालीन आईजी डांगी मामला: जांच की जानकारी नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त, शासन को एक सप्ताह की मोहलत…*
छत्तीसगढ़ उजाला

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगे अश्लील हरकतों और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों के मामले में हाईकोर्ट ने जांच को लेकर राज्य शासन के रवैये पर सख्ती दिखाई है. याचिकाकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी अदालत में पेश नहीं करने पर जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने 2 सितंबर 2026 को शासन को एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है।
राज्य शासन की ओर से 12 अगस्त 2026 के आदेश के परिपालन में जानकारी पेश नहीं की जा सकी. हाईकोर्ट ने इस पर राज्य शासन को अंतिम मोहलत देते हुए एक सप्ताह का समय दिया है. साथ ही सख्त हिदायत दी है कि यदि इस अवधि में शिकायत पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत नहीं की जाती है, तो संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पैरवी की।
क्या है मामला:-
बिलासपुर की महिला योग टीचर ने आईपीएस रतनलाल डांगी पर ऑनलाइन योगा क्लास के दौरान अश्लील बातचीत करने, वीडियो कॉल पर नग्न होने और बात न मानने पर उनके सब इंस्पेक्टर पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने व घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में ट्रांसफर कराने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को सबूतों के साथ डीजीपी के पास शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में मार्च में डांगी को सस्पेंड कर दिया गया था।
जांच के लिए डीजीपी द्वारा तत्कालीन आईजीपी आनंद छाबड़ा व तत्कालीन डीआईजीपी मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था. पीड़िता के अनुसार दोनों अधिकारी आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. इस पर पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर मामले की जांच किसी सीनियर महिला आईएएस अधिकारी से कराने की मांग की है।




