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छत्तीसगढ़ के 14वें मंत्री की नियुक्ति पर संवैधानिक सवाल! हाई कोर्ट में सुनवाई टली, अब नए चीफ जस्टिस की बेंच के सामने आएगा बड़ा मामला

बिलासपुर/रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ सरकार में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाली महत्वपूर्ण याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई फिलहाल टल गई है। मामला राज्य के मंत्रिमंडल की अधिकतम संख्या और संविधान में निर्धारित सीमा से जुड़ा होने के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वासु चक्रवर्ती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर भादुड़ी न्यायालय में उपस्थित हुए।

सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह बेहद बड़ा और संवैधानिक विषय है, जिस पर विस्तार से सुनवाई किए जाने की आवश्यकता है। मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दी।

मामले ने इसलिए भी राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज कर दी है क्योंकि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा 4 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में अब इस महत्वपूर्ण याचिका की अगली सुनवाई नए मुख्य न्यायाधीश की बेंच के समक्ष होने की संभावना जताई जा रही है।

90 सीटों वाली विधानसभा और 15 प्रतिशत का गणित

राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को लेकर अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

90 का 15 प्रतिशत 13.5 होता है। इसी गणित को लेकर विवाद खड़ा हुआ है कि मंत्रिमंडल की अधिकतम संख्या 13 मानी जाए या 13.5 के आधार पर इसे बढ़ाकर 14 मंत्री किया जा सकता है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में हरियाणा मॉडल या फॉर्मूले की तर्ज पर 13.5 को 14 मानते हुए 14वें मंत्री की नियुक्ति की गई है। हालांकि, यही निर्णय अब न्यायिक चुनौती का विषय बन गया है।

विपक्ष ने बताया असंवैधानिक

विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वासु चक्रवर्ती ने 14वें मंत्री की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या 90 सदस्यीय विधानसभा वाले छत्तीसगढ़ में 14 सदस्यीय मंत्रिमंडल संवैधानिक रूप से वैध है? इस महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल पर आने वाला फैसला प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया है। नए मुख्य न्यायाधीश की बेंच के समक्ष होने वाली अगली सुनवाई पर सरकार, विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी।

14वें मंत्री की नियुक्ति का मामला अब केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि एक बड़े संवैधानिक परीक्षण के रूप में सामने आ गया है।

प्रशांत गौतम

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