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छत्तीसगढ़ उजाला की खबर का असर: जिला पंचायत भवन निर्माण में गड़बड़ी के आरोपों के बीच EE बाबूलाल सिहासरे रिलीव, PWD EE नित्या ठाकुर को प्रभार

जी. पी. एम. (छत्तीसगढ़ उजाला)-जिला पंचायत भवन निर्माण की निविदा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और लापरवाही को लेकर उठे सवालों के बीच बड़ी कार्रवाई सामने आई है। छत्तीसगढ़ उजाला की खबर और शिकायत के बाद ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) मरवाही के कार्यपालन अभियंता (EE) बाबूलाल सिहासरे को कलेक्टर ने तत्काल रिलीव कर दिया है। उनके स्थान पर PWD की EE नित्या ठाकुर को प्रभार सौंपा गया है।

गौरतलब है कि 18 अगस्त 2026 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी संभाग, मरवाही के EE बाबूलाल सिहासरे का तबादला मोहला-मानपुर किया गया था। तबादला आदेश के बावजूद उन्हें रिलीव किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे थे।

इसी मामले को लेकर छत्तीसगढ़ उजाला ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर जिला पंचायत भवन निर्माण की निविदा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, कर्तव्यों के प्रति लापरवाही और शासन को संभावित आर्थिक नुकसान के आरोपों को सामने रखा था। मामले में श्री जी कंस्ट्रक्शन और कांग्रेस जिला महामंत्री पवन केशरवानी की ओर से भी गृह मंत्री, उच्च अधिकारियों, कलेक्टर और जिला पंचायत CEO के समक्ष शिकायत की गई थी।

शिकायत और प्रकाशित खबर के बाद मामले ने तूल पकड़ा। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लेते हुए बाबूलाल सिहासरे को तत्काल रिलीव कर दिया, जिसके बाद PWD की EE नित्या ठाकुर को संबंधित कार्य का प्रभार सौंपा गया है।

शिकायत पर कार्रवाई, उठे सवालों के बाद बदली व्यवस्था

इस कार्रवाई को जिला पंचायत भवन निर्माण से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि निर्माण कार्य की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण शासन को आर्थिक क्षति पहुंच सकती है। अब संबंधित अधिकारी को रिलीव किए जाने के बाद मामले में आगे की जांच और निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी नजर रहेगी।

कांग्रेस जिला महामंत्री पवन केशरवानी ने कार्रवाई पर संतोष जताते हुए जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के लिए कलेक्टर और जिला पंचायत CEO का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में शिकायतों को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई होना जरूरी है। प्रशासन की इस कार्रवाई से जनता के बीच यह संदेश गया है कि शिकायतों और मीडिया के माध्यम से सामने आने वाले गंभीर मामलों पर प्रशासन संज्ञान ले सकता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि जिला पंचायत भवन निर्माण की निविदा में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो आगे क्या कार्रवाई होती है।

प्रशांत गौतम

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