कबीर-रहीम की परंपरा में श्रम की साधना करते हैं डॉ. सोमनाथ: अतुल तिवारी
‘श्रम साधक’ पुस्तक का भव्य विमोचन, बॉलीवुड अभिनेता अतुल तिवारी का हुआ नागरिक अभिनंदन
प्रयागराज। डॉ. सोमनाथ शुक्ल के दोहे पढ़कर सहज ही कहा जा सकता है कि उन्होंने कबीर और रहीम की तरह साधना करके काव्य रचा है। मजदूरों और श्रमिकों को केंद्र में रखकर सहज भाषा में दोहा लिखना बड़ी बात है। उनकी सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘श्रम साधक’ में श्रमिकों के जीवन, संघर्ष और हालात को जिस संवेदनशीलता के साथ रेखांकित किया गया है, वह आज के दौर में बेहद उल्लेखनीय है।
यह बात बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता अतुल तिवारी ने रविवार शाम सिविल लाइंस स्थित एक होटल में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में कही। साहित्यिक संस्था ‘गुफ़्तगू’ की ओर से आयोजित समारोह में डॉ. सोमनाथ शुक्ल की पुस्तक ‘श्रम साधक’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।
‘पहली बार किसी शहर ने किया मेरा नागरिक अभिनंदन’
समारोह के दौरान साहित्यिक संस्था ‘गुफ़्तगू’ की ओर से अभिनेता अतुल तिवारी का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। सम्मान से अभिभूत अतुल तिवारी ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी शहर ने इस तरह उनका नागरिक अभिनंदन किया है। उन्होंने कहा कि उनके गृह नगर लखनऊ में भी अब तक इस तरह का नागरिक अभिनंदन नहीं हुआ। उन्होंने सम्मान के लिए ‘गुफ़्तगू’ संस्था का हृदय से आभार व्यक्त किया।
समकालीन समाज और श्रमिक जीवन का आईना है ‘श्रम साधक’
पुस्तक पर चर्चा के दौरान वक्ताओं ने डॉ. सोमनाथ शुक्ल के लेखन और विषय चयन की जमकर सराहना की।
डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि डॉ. सोमनाथ ने दोहा लेखन के लिए जिन गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया है, उन पर आज के दौर में काव्य लेखन लगभग नहीं हो रहा है। हालांकि इन विषयों पर कहानियां जरूर लिखी जा रही हैं।
डॉ. इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी ने डॉ. सोमनाथ शुक्ल को अपने दौर का बेहद प्रतिभावान कवि बताते हुए कहा कि समाज में ऐसे रचनाकारों का उचित सम्मान होना चाहिए।
डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि पुस्तक के कई दोहे इतने जीवंत हैं कि वे सीधे उनके अपने जीवन से जुड़े हुए महसूस होते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने ‘श्रम साधक’ को समाज के लिए बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण कृति बताया। उन्होंने डॉ. सोमनाथ शुक्ल के लेखन की सराहना करते हुए पुस्तक को सामाजिक सरोकारों से जुड़ा प्रभावशाली साहित्यिक प्रयास बताया।
साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम का सफल संचालन मनमोहन सिंह तन्हा ने किया। अंत में नरेश कुमार महरानी ने अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर प्रभाशंकर शर्मा, नीना मोहन श्रीवास्तव, शैलेंद्र जय, आसिफ़ उस्मानी, डॉ. एस.एम. अब्बास, डॉ. वीरेंद्र कुमार तिवारी, शिबली सना, अफसर जमाल, शिवाजी यादव, मंजुलता नागेश, सुनील दानिश, धीरेंद्र सिंह नागा, क्षमा द्विवेदी और शाहीद खुश्बू सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।



