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छत्तीसगढ़ उजाला की खबर का असर! संलग्न कर्मचारियों की वापसी का आदेश जारी, लेकिन जमीनी हकीकत पर अब भी सवाल

बैकुण्ठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-शिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे कथित संलग्नीकरण (अटैचमेंट) के मामले को लेकर लगातार प्रकाशित हो रही छत्तीसगढ़ उजाला की खबरों का असर अब दिखाई देने लगा है। जनदर्शन में हुई शिकायतों, समाचारों में उठाए गए सवालों और जनहित में सामने आए तथ्यों के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया ने 24 जून 2026 को आदेश जारी कर तहसील कार्यालय बैकुण्ठपुर, सोनहत और पटना में कार्यरत शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि आदेश जारी होने के बाद भी कई कर्मचारियों के तहसील कार्यालयों में कार्यरत रहने की जानकारी सामने आने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है या वास्तव में आदेश का पालन भी कराया जाएगा।

मामला लंबे समय से चर्चा में था। छत्तीसगढ़ उजाला ने लगातार खबरें प्रकाशित कर यह सवाल उठाया था कि विद्यालयों में शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय स्टाफ की कमी होने के बावजूद कई कर्मचारी तहसील कार्यालयों में क्यों कार्यरत हैं। वहीं विभागीय स्तर पर पहले यह जानकारी दी गई थी कि शिक्षा विभाग का कोई भी कर्मचारी संलग्न नहीं है।

लेकिन बाद में सामने आए दस्तावेजों और विद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा लिखे गए पत्रों ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए। प्राचार्यों ने स्पष्ट रूप से अपने कर्मचारियों को मूल संस्था में वापस भेजने की मांग करते हुए कहा था कि स्टाफ की कमी के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

स्थिति तब और रोचक हो गई जब जनदर्शन शिकायत क्रमांक 2010226000922 के संदर्भ में स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी को कर्मचारियों को मूल पदस्थापना संस्था में वापस भेजने संबंधी आदेश जारी करना पड़ा। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि कोई कर्मचारी संलग्न नहीं था, तो फिर उन्हें कार्यमुक्त कर वापस भेजने का आदेश क्यों जारी किया गया?

अब आदेश जारी होने के बाद भी यदि कर्मचारी तहसील कार्यालयों में कार्यरत पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक आदेशों के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों से जनगणना कार्य के नाम पर अन्य कार्यालयीन कार्य भी कराए जा रहे हैं।

पूरे मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर विभाग द्वारा संलग्नीकरण नहीं होने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं कर्मचारियों को वापस भेजने के आदेश जारी किए जाते हैं। ऐसे विरोधाभासी तथ्यों से आम जनता के मन में स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न हो रहा है।

गौरतलब है कि कलेक्टर कोरिया रोक्तिमा यादव लगातार अधिकारियों को परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति अपनाने की नसीहत देती रही हैं। उनका चर्चित संदेश—”काम हो जाएगा नहीं, काम हो गया है सुनना चाहती हूं”—आज भी प्रशासनिक बैठकों में गूंजता है।

अब देखना यह होगा कि छत्तीसगढ़ उजाला द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर जारी आदेश का वास्तविक पालन कब तक सुनिश्चित होता है, या फिर संलग्नीकरण का यह विवाद केवल आदेशों और पत्राचार तक ही सीमित रह जाएगा।

प्रशांत गौतम

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