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छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब 1 अप्रैल से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी बदलाव का निर्णय लिया है। प्रदेश में अब नया शैक्षणिक सत्र हर वर्ष 1 अप्रैल से शुरू किया जाएगा, जबकि अब तक अधिकांश सरकारी स्कूलों में सत्र जून या जुलाई से प्रारंभ होता रहा है। सरकार का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

CBSE पैटर्न के अनुरूप होगा सत्र संचालन

राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को CBSE और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप ढालना है। वर्तमान व्यवस्था में राज्य बोर्ड और CBSE स्कूलों के सत्र संचालन में अंतर होने के कारण विद्यार्थियों को कई बार शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नए निर्णय के बाद यह अंतर काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

छात्रों को मिलेगा पूरा शैक्षणिक समय

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल से सत्र शुरू होने पर विद्यार्थियों को पूरे शैक्षणिक वर्ष का लाभ मिल सकेगा। अभी तक गर्मी की छुट्टियों और सत्र देर से शुरू होने के कारण पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय अपेक्षाकृत कम हो जाता था। नई व्यवस्था में पाठ्यक्रम को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने, नियमित मूल्यांकन और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने में सुविधा होगी।

परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में भी बदलाव संभव

नए सत्र के साथ-साथ वार्षिक कैलेंडर, परीक्षा कार्यक्रम, आंतरिक मूल्यांकन, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रमों को भी नए शेड्यूल के अनुसार संचालित किया जाएगा। इससे स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों का बेहतर समन्वय संभव हो सकेगा।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा लाभ

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं जैसे JEE, NEET, CUET और अन्य प्रवेश परीक्षाएं जिस शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार आयोजित होती हैं, उसके अनुरूप राज्य बोर्ड के छात्रों को भी तैयारी का पर्याप्त समय मिलेगा। इससे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में उनकी भागीदारी और प्रदर्शन बेहतर होने की संभावना है।

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को मिलेगी मजबूती

सरकार के इस फैसले को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, आधुनिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाना है। अप्रैल से सत्र प्रारंभ होने से शैक्षणिक योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना आसान होगा।

जल्द जारी होंगे विस्तृत दिशा-निर्देश

सूत्रों के मुताबिक, स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इसके बाद प्रदेश के सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में नए शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार गतिविधियों का संचालन शुरू किया जाएगा। अवकाश सूची, परीक्षा कार्यक्रम और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं में भी आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

लाखों विद्यार्थियों पर पड़ेगा असर

प्रदेश सरकार के इस निर्णय का सीधा प्रभाव लाखों विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों पर पड़ेगा। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा राष्ट्रीय मानकों के और करीब पहुंच सकती है तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

प्रशांत गौतम

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