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छत्तीसगढ़ में जेलों की अव्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त: “नोट दो, सुविधा लो” सिस्टम पर नाराजगी, मैनुअल पालन और पूरी रिपोर्ट के निर्देश


बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ की जेलों में फैली अव्यवस्थाओं और कथित उगाही की शिकायतों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि जेलों को “आरामगाह” बनने नहीं दिया जाएगा और नियमों से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।
उगाही और बदहाल हालात पर कोर्ट की नाराजगी
“नोट दो, सुविधा लो” जैसी कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए कोर्ट ने कहा कि इससे बंदियों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। जेल विभाग की निष्क्रियता पर नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत ने सुधारात्मक सेवाओं के उद्देश्य को याद दिलाया।
मॉडल जेल मैनुअल 2016 के पालन के निर्देश
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि नई जेलों के निर्माण और संचालन में मॉडल जेल मैनुअल 2016 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
सुनवाई के दौरान जेलों में बढ़ती कैदियों की संख्या (ओवरक्राउडिंग), स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और अन्य अव्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठाए गए।
नई जेलों के निर्माण पर सरकार का पक्ष
मामले में याचिकाकर्ता शिवराज सिंह की ओर से उठाए गए मुद्दों पर राज्य सरकार ने जवाब दाखिल किया। डीजी जेल की ओर से पेश शपथपत्र में बताया गया कि:
बिलासपुर के बैमा-नगई में नई जेल का निर्माण तेजी से जारी है।
यह निर्माण मॉडल जेल मैनुअल 2016 के मानकों से भी उच्च स्तर पर किया जा रहा है।
गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी निगरानी कर रही है।
बेमेतरा में 200 कैदियों की क्षमता वाली ओपन जेल का निर्माण पूरा हो चुका है।
5 मई तक मांगी पूरी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने डीजी जेल को निर्देश दिए हैं कि 5 मई तक सभी जेलों की विस्तृत जानकारी शपथपत्र के माध्यम से पेश करें। इसमें यह स्पष्ट करना होगा:
वर्तमान जेलों की कुल क्षमता क्या है
वास्तविक कैदियों की संख्या कितनी है
क्या कैदियों को निर्धारित मानकों के अनुसार जगह और सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं
साथ ही, जेल निर्माण और संचालन में तय 11 बिंदुओं के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और नियमित निरीक्षण करने के आदेश भी दिए गए हैं।
अगली सुनवाई 5 मई को
मामले की अगली सुनवाई 5 मई को निर्धारित की गई है, जहां अदालत राज्य सरकार की प्रगति रिपोर्ट का मूल्यांकन करेगी।

प्रशांत गौतम

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