आईएएस राजेश सिंह राणा की अनोखी पहल: पुराना घर दान कर खोला ‘अजीत सिंह राणा मेमोरियल स्किल सेंटर’, गरीब महिलाओं-युवाओं को मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण

दिल्ली। समाज सेवा और सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए आज PHD Family Welfare Foundation (PHDFWF) ने Jaquar Foundation के सहयोग से दिल्ली के ओल्ड सीमापुरी क्षेत्र में “अजीत सिंह राणा मेमोरियल स्किल सेंटर” का भव्य उद्घाटन किया। यह केंद्र समाज के वंचित वर्ग, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा। झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में कई प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी श्री राजेश सिंह राणा, उनकी माता श्रीमती राजवती राणा, श्रीमती जिज्ञासा राणा, जाक्वार फाउंडेशन के सीएसआर हेड श्री कंवर शमशेर तथा श्री राणा के परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। PHDFWF की चेयरपर्सन श्रीमती अनुराधा गोयल ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
विशेष बात यह है कि इस स्किल सेंटर के लिए भवन स्वयं आईएएस राजेश सिंह राणा ने उदारतापूर्वक दान किया है। उन्होंने अपने पुराने घर को पूरी तरह से फ्री स्किल सेंटर के रूप में समर्पित कर दिया, ताकि सीमापुरी के गरीब और जरूरतमंद समुदाय को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकें।
अपने संबोधन में श्री राणा भावुक होते हुए बोले कि समाज ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया है, इसलिए अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे समाज को कुछ लौटाएं। उन्होंने इस केंद्र का नाम अपने दिवंगत पिता स्वर्गीय अजीत सिंह राणा की स्मृति में रखा और प्रशिक्षण के लिए नामांकित सभी युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
यह फ्री स्किल डेवलपमेंट सेंटर खास तौर पर महिलाओं और युवाओं के लिए तैयार किया गया है। यहां टेलरिंग (सिलाई), एम्ब्रॉयडरी (कढ़ाई), इंग्लिश स्पीकिंग, सेल्फ डिफेंस, ब्यूटीशियन ट्रेनिंग, कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए कोचिंग, कंप्यूटर ट्रेनिंग सहित कई कौशल विकास कार्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रतिभागियों को रोजगार योग्य बनने, आत्मविश्वास बढ़ाने और बेहतर जीवन की नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद है।
यह पहल सीमापुरी जैसे क्षेत्रों में रहने वाले वंचित समुदायों के लिए न केवल कौशल विकास का माध्यम बनेगी, बल्कि आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।





