
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में करीब 22 महीनों से केंद्रीय जेल में निरुद्ध पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और बिल्डर अनवर ढेबर को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि “गंभीर आरोप मात्र जमानत से इनकार का एकमात्र आधार नहीं हो सकते।” साथ ही यह भी कहा कि ट्रायल निकट भविष्य में शुरू या समाप्त होने की संभावना नहीं दिखती।
हालांकि, जमानत आदेश के बावजूद दोनों की रिहाई फिलहाल संभव नहीं हो पाएगी, क्योंकि आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) ने दोनों को अन्य प्रकरणों में पुनः गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है मामला?
राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW/ACB) ने 17 जनवरी 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर सहित अन्य ने कथित रूप से कार्टेल बनाकर राज्य की आबकारी नीति में हेरफेर की। उन पर अवैध कमीशन वसूली और सरकारी दुकानों से नकली होलोग्राम वाली शराब बिक्री के जरिए राज्य को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
प्रकरण में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध दर्ज हैं।
राज्य सरकार ने किया जोरदार विरोध
जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य ने इसे संगठित अपराध बताते हुए आरोपियों की केंद्रीय भूमिका का हवाला दिया और आशंका जताई कि रिहाई की स्थिति में गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है। राज्य ने अदालत में डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया।
किस आधार पर मिली जमानत?
हाईकोर्ट ने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी 18 महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो सका है। अभियोजन स्वीकृति लंबित होने के कारण मुकदमे की शुरुआत में देरी हुई है।
अदालत ने कहा कि यह एक विशाल ट्रायल है, जिसमें 7 आरोप पत्र, 51 आरोपी, 1111 गवाह और हजारों पन्नों के दस्तावेज शामिल हैं। ऐसे में विचारण में वर्षों लग सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत दीर्घ कारावास और संभावित विलंब के आधार पर दी जा रही है, न कि मामले के मेरिट पर।
जमानत की शर्तें
जस्टिस अरविंद वर्मा ने आदेश में कई शर्तें लगाईं हैं—
पासपोर्ट जमा करना होगा
जांच और ट्रायल में पूर्ण सहयोग करना होगा
किसी गवाह या प्रकरण से जुड़े व्यक्ति को प्रभावित नहीं करेंगे
जमानत अवधि में कोई नया अपराध नहीं करेंगे
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त के उल्लंघन पर अभियोजन को जमानत निरस्तीकरण के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी।
जमानत के बाद नई गिरफ्तारी, रिहाई पर रोक
जमानत आदेश के बावजूद अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। हाल ही में EOW ने अनिल टुटेजा को डीएमएफ मामले में तथा अनवर ढेबर को आबकारी से जुड़े एक अन्य प्रकरण में आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया है।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब आबकारी घोटाला मामले में जमानत पर फैसला सुरक्षित था।
बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
बचाव पक्ष ने इस कार्रवाई को विधिक अधिकारों के दुरुपयोग के रूप में निरूपित किया है।
एडवोकेट फैजल रिज़वी ने कहा—
“यह मानने में ज्यादा दिक्कत नहीं है कि यह गिरफ्तारी केवल इसलिए की गई है ताकि आबकारी घोटाले में जमानत मिलने की स्थिति में भी दोनों जेल से बाहर न आ सकें।”
वहीं अनवर ढेबर के अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने कहा—
“एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारी के अधिकारों का न्यायसंगत उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को संवैधानिक न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई है।”
अब इस बहुचर्चित मामले में कानूनी लड़ाई और तेज हो गई है। एक ओर हाईकोर्ट की जमानत राहत है, तो दूसरी ओर नई गिरफ्तारी ने विवाद को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में संवैधानिक अदालतों का रुख इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगा




