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विश्व हिंदी दिवस पर हैदराबाद में मेघा अग्रवाल को त्रिभाषा अधिवेशन साहित्य सम्मान


हैदराबाद। विश्व हिंदी दिवस (10 जनवरी 2026) के अवसर पर प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा एवं एस.एच.एम.वी. फाउंडेशन, हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में भव्य त्रिभाषी अधिवेशन, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस गरिमामय आयोजन में नागपुर की साहित्यकार सौ. मेघा मनोज अग्रवाल को उनके साहित्यिक योगदान के लिए त्रिभाषा अधिवेशन साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान कार्यक्रम के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी द्वारा प्रदान किया गया।
समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. रवि नूतला शशिधर, तेलुगु वक्ता आचार्य कासी रेड्डी वेंकट रेड्डी (पूर्व अध्यक्ष, तेलुगु विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय), संस्कृत वक्ता चिलकर्मरी लक्ष्मीनाथ आचार्य (विरमित उपन्यासक एवं अध्यक्ष, संस्कृत भारती ट्रस्ट, तेलंगाना), हिंदी वक्ता गजेंद्र पाठक (सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, हैदराबाद), डॉ. गुंडाल विजय कुमार (संस्थापक, एस.एच.एम.वी. फाउंडेशन), रामवल्लभ इंदौरी सहित अनेक विशिष्ट विद्वान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन से हुआ। सरस्वती वंदना का मधुर स्वरपाठ देवी सीमा शर्मा ‘मंजरी’ (मेरठ) ने किया। इसके पश्चात प्रदीप मिश्र ‘अजनबी’ (दिल्ली) के निर्देशन में आयोजित कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवि-कवयित्रियों—डाॅ. दुर्गेश नंदिनी (हैदराबाद), राकेश मणि त्रिपाठी (पनवेल), अनिल राही (ग्वालियर), सुहास भटनागर (हैदराबाद), अजय कुमार पाण्डेय (हैदराबाद), कृष्ण कुमार द्विवेदी (नागपुर), बालकृष्ण महाजन (नागपुर), राजेंद्र कुमार रुंगटा (बिलासपुर/हैदराबाद), अंजलि मिश्रा तिवारी (बस्तर), सोनिया नायडू (दुर्ग, छत्तीसगढ़) सहित अनेक रचनाकारों ने काव्यपाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
समारोह में अतिथियों ने हिंदी, तेलुगु और संस्कृत—तीनों भाषाओं पर अपने विचार रखे तथा त्रिभाषा के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान सभी आमंत्रित कवियों एवं अतिथियों का सम्मान भी किया गया।
इस अवसर पर मेघा अग्रवाल ने “हिंदी राष्ट्र की भाषा बननी चाहिए” विषय पर सशक्त काव्यपाठ प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनके प्रभावशाली वक्तव्य और काव्य प्रस्तुति से नागपुर शहर को उन पर विशेष गर्व महसूस हुआ।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रदीप मिश्र ‘अजनबी’ (दिल्ली) ने किया, जबकि समापन अवसर पर अवनीश कुमार शुक्ला ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन हिंदी के साथ-साथ त्रिभाषा के समन्वय और प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

प्रशांत गौतम

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