
रायपुर। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के फेस-IV के अंतर्गत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लगभग 2500 करोड़ रुपये की विशाल निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। योजना में व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर एवं भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री डॉ. देवेन्द्र माडला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में सड़क विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 2500 करोड़ रुपये की राशि की निविदाएं NIT क्रमांक 1076, 1077, 1078, 1079, 1080, 1081 एवं 1082 के तहत आमंत्रित की गई हैं, लेकिन प्रभारी प्रमुख अभियंता के.के. कटारे द्वारा जानबूझकर निविदा की शर्तों में बदलाव कर अपने करीबी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
नियमों को तोड़कर बदली गई टेंडर शर्तें
शिकायत में कहा गया है कि PMGSY के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित Standard Bidding Document (SBD) के अनुसार बिड कैपेसिटी की गणना हमेशा वार्षिक टर्नओवर के तीन गुना के आधार पर होती रही है, लेकिन कुछ निविदाओं में इसे दो गुना कर दिया गया है। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो रही है और छोटे-मध्यम ठेकेदार स्वतः बाहर हो जा रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही समय में जारी निविदाओं में कहीं 3 गुना और कहीं 2 गुना की गणना लागू की गई है, जो भ्रष्ट नीयत और पक्षपातपूर्ण निर्णय की ओर इशारा करता है।
कार्य अवधि में भी भारी अनियमितता
शिकायतकर्ताओं ने बताया कि 3 करोड़ से लेकर 40 करोड़ रुपये तक के सभी कार्यों के लिए सिर्फ 12 माह की कार्यावधि तय की गई है, जो व्यवहारिक रूप से असंभव है। आरोप है कि यह जानबूझकर किया गया ताकि अधिकांश ठेकेदार निविदा से बाहर हो जाएं और बाद में चहेते ठेकेदारों को समय-वृद्धि देकर काम सौंपा जा सके।
दूर-दराज की सड़कों को जोड़कर बनाई गई बड़ी निविदाएं
आरोप है कि अलग-अलग ब्लॉकों की 40–50 किलोमीटर दूर स्थित सड़कों को एक साथ जोड़कर 20 से 40 करोड़ रुपये की एकल निविदाएं बनाई गई हैं, जिससे प्रदेश के लगभग 95 प्रतिशत ठेकेदारों को काम से वंचित करने की साजिश रची गई है।
पुराना भ्रष्टाचार प्रकरण भी लंबित
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि के.के. कटारे के खिलाफ EOW/ACB में अपराध क्रमांक 27/2019 दर्ज है। इसके बावजूद उन्हें पुनः प्रभारी प्रमुख अभियंता बनाया गया और अब उसी प्रकरण को समाप्त करने के लिए आरोपी अधिकारी से ही स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है, जिसे प्रभावी संरक्षण बताया गया है।
निविदा निरस्त करने का ‘खेल’
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जनवरी 2024 में दोबारा प्रभार संभालने के बाद से के.के. कटारे द्वारा तकनीकी आधार पर ठेकेदारों की निविदाएं जानबूझकर Disqualify की जा रही हैं। शपथ पत्रों को फाड़ना, डाक में विलंब कराना और विरोध करने पर धमकाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
छोटे ठेकेदारों को बाहर करने की साजिश
निविदाओं में 2% अमानत राशि की शर्त के चलते 40 करोड़ की निविदा में 80 लाख रुपये जमा करना अनिवार्य हो गया है, जो अधिकांश ठेकेदारों के लिए संभव नहीं है। आरोप है कि यह पूरा ढांचा कुछ गिने-चुने ठेकेदारों के बीच काम को केन्द्रित (Centralize) करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
PMGSY की मूल भावना से खिलवाड़
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदृष्टि से शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है।
अब देखना यह है कि केंद्र और राज्य सरकार इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करती है, या फिर 2500 करोड़ की इस योजना पर उठे सवाल यूं ही फाइलों में दबकर रह जाएंगे।




