गौरेला पेंड्रा मरवाही

कुड़कई पंचायत में भ्रष्टाचार की नई परतें: सचिव संतराम यादव घोटाले के घेरे में, नाली निर्माण में भी उजागर हुई गड़बड़ी



पेंड्रा। ग्राम पंचायत कुड़कई में सचिव संतराम यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार और वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप फिर सुर्खियों में हैं। पंचायत निधि की वसूली में लापरवाही से लेकर ठेका घोटाले और पुराने विवादों तक, अब एक और मामला सामने आया है—15वें वित्त से बनी नाली निर्माण में अनियमितता।

ठेका घोटाले का विवाद

वित्तीय वर्ष 2024-25 में ग्राम पंचायत कुड़कई का पशु पंजीयन ठेका ₹61,00,100 में दिया गया था। ठेकेदार भरतलाल कश्यप ने केवल ₹33,22,000 ही जमा किए, जबकि ₹27,78,100 अब भी बकाया है। इसके बावजूद न तो शेष राशि की वसूली हुई और न ही FIR दर्ज की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव ने जानबूझकर कार्रवाई रोक रखी और उसी परिवार के राधेश्याम कश्यप को नया ठेका दिलवाने में मुख्य भूमिका निभाई।

नाली निर्माण में भी धांधली

प्राप्त सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर 2024 में कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि ग्राम पंचायत के 15वें वित्त से देवीप्रसाद के घर से माताचौरा मार्ग तक बनी नाली निर्माण कार्य में भारी अनियमितता हुई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री और फर्जी मापदंड अपनाए गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस शिकायत की जांच प्रक्रिया आज तक लंबित है।

सचिव की पुरानी करतूतें

ग्रामवासियों ने बताया कि संतराम यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। कुछ वर्ष पूर्व पंचायत भवन में उनका शराब पीते वीडियो वायरल हुआ था, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि आज वे “मुझे जानकारी नहीं है” कहकर हर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हैं।

अफसरों की शह और ग्रामीणों की नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद स्तर के अफसरों की मिलीभगत से सचिव को संरक्षण प्राप्त है। नतीजतन पंचायत की लाखों की राशि ठेकेदारों के साथ मिलकर हड़प ली जाती है और विकास कार्य ठप पड़े हैं।

आंदोलन की तैयारी

ग्रामीण अब सचिव संतराम यादव के निलंबन और उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर जिला प्रशासन तक जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।




जनता का सवाल सीधा है —
👉 “पंचायत की लाखों रुपये की राशि और विकास निधि आखिर कौन डकार रहा है? ठेका और नाली निर्माण में गड़बड़ी के बावजूद सचिव पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?”

कुड़कई पंचायत का यह मामला अब सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता का प्रतीक बन चुका है। सचिव की मनमानी, सरपंच की चुप्पी और अधिकारियों की मिलीभगत ने पंचायत को भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।


प्रशांत गौतम

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