छत्तीसगढ

*●सियासत●* *लाली मेरे लाल की, जित देखूं, उत लाल…….* *विष्णु का अभिषेक देखने उमड़ा छत्तीसगढ़…*

*सियासत*

(अनिल मिश्रा)

रायपुर छत्तीसगढ़ उजाला। छत्तीसगढ़ महतारी ने पूर्व में अपनी पांच संतानों का राज्याभिषेक देखा है लेकिन आज राज्य के चौथे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अभिषेक में जिस तरह सरगुजा, बस्तर सहित समूचा छत्तीसगढ़ उमड़ पड़ा, वह अभूतपूर्व है। सुदूर वनांचलों से आई महिलाओं की भारी भीड़ ने विष्णुदेव के राजतिलक में शामिल होकर उन्हें आशीर्वाद देना पहली प्राथमिकता में रखा। छत्तीसगढ़ में पहली बार आदिवासी माता के लाल का लोक सिंहासन पर आसीन होना वाकई उत्साह का विषय है। मगर इस बार मुख्यमंत्री के शपथ समारोह का उत्साह सातवें आसमान पर रहा। जनता इस बार मोदी के लिए कम और उनके आशीर्वाद की छत्रछाया में सिंहासन पर विराजे विष्णु को देखने ज्यादा आई। हालांकि इसके लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के दौरान छत्तीसगढ़ की जनता को न्यौता दे गए थे। भाजपा की ओर से रामलला के दर्शन का भी न्यौता दिया गया था।

जनता ने दोनों न्यौते स्वीकार किए। पहले न्यौते पर पूरे प्रदेश की जनता शपथ समारोह की साक्षी बनेगी। अब इंतजार है कि भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार दूसरे न्यौते के तहत अगले महीने रामलला के भव्य मंदिर में प्रभु श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम ननिहाल के नर नारियों को अयोध्या ले जाएगी। विष्णुदेव की ताजपोशी के माहौल ने साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की नेक दिल जनता भले आदमी का पूरा व्यक्तित्व पल भर में पढ़ लेती है। इससे पहले छत्तीसगढ़ में प्रथम और आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में अजीत जोगी ने शपथ ली थी लेकिन वे तीन साल में कांग्रेस सहित सत्ता से बाहर हो गए।

इसके बाद छत्तीसगढ़ की जनता को अपनी सरकार चुनने का अवसर मिला तो जनता ने भाजपा को चुना और भाजपा ने डॉ. रमन सिंह को मुख्यमंत्री चुन लिया। तब शपथ समारोह में जोरदार उत्साह देखा गया था। डॉ. रमन सिंह ने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और छत्तीसगढ़ को विकास की ऊंचाई पर पहुंचाया। 2018 में भाजपा को जनता ने ठुकराकर कांग्रेस को एकतरफा अंतर से चुना। 15 साल बाद कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ था तो भूपेश बघेल की ताजपोशी में जबरदस्त उत्साह का माहौल था लेकिन इस बार का मुख्यमंत्री शपथ समारोह पिछले ऐसे सारे समारोहों पर भारी पड़ा। बस्तर, सरगुजा, जशपुर के अलावा झारखंड, उड़ीसा के लोग भी लोकतंत्र के इस सबसे बड़े उत्सव का आनंद मनाने रायपुर आए। अब बात करें कि इतना उत्साह क्यों? पांच साल में कांग्रेस से जनता इतनी खफा क्यों हो गई कि 71 से 35 पर ला दिया। वैसे यह कांग्रेस की चिंता का विषय है। वह कर रही है।

अभी तो विष्णु के सिंहासन पर विराजने के मौके पर उमड़े उत्साह की तरफ देखें तो यह उत्साह स्व स्फूर्त दिखाई पड़ रहा है। विष्णुदेव राजनीति की चमक दमक से दूर अपने स्तर पर भाजपा की सेवा में लगे हुए थे। भाजपा संगठन में समय समय पर दायित्व बदलते रहते हैं। विष्णुदेव को संगठन की जिम्मेदारी से मुक्त किए जाते समय कांग्रेस उपहास उड़ा रही थी, तब कांग्रेस के विद्वानों के दिमाग में सपने में भी नहीं आया होगा कि समय आने पर भाजपा ने विष्णु के लिए क्या सोच रखा है। रणनीति के तहत संगठन को आक्रामक किया। विपक्ष काल में संगठन आक्रामक होना चाहिए, भाजपा ने इस जरूरत को पूरा किया। सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल जाती है। सत्ता को गंभीर, सहिष्णु मुखिया की जरूरत होती है। यह खूबी विष्णु देव में है। लिहाजा उन्हें कमान सौंपी गई। भाजपा ने सत्ता का समायोजन इस तरीके से किया है कि पूरे अंचल खुश हैं। पहली बार आदिवासी मुख्यमंत्री को लेकर सरगुजा से लेकर बस्तर तक लाल है।

Anil Mishra

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