छत्तीसगढ

मरवाही वनमंडल में आदिवासी मजदूरों के शोषण का मामला उठा विधानसभा में , वनअमले के नीचे से ऊपर तक के अधिकारी/कर्मचारी घोटालों में शामिल , अब होगी कार्रवाही

रायपुर छत्तीसगढ़ उजाला:

मरवाही वनमंडल के मरवाही वन परिक्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के नाम पर करोड़ो रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है वनकर्मियों द्वारा आदिवासी मजदूर के पेट मे लात मारते हुए करोड़ो रुपये की हेराफेरी का मामला आज सदन में उठा जिसको लेकर अकलतरा विधायक राघवेंद्र सिंह ने ध्यानाकर्षण के माध्यम विधानसभा में जवाब तलब किया है .

दरअसल पूरा मामला मरवाही विधान सभा के मरवाही वन परिक्षेत्र का है जहाँ मजदूर बैंक सूची में फर्जीवाड़ा किया गया है इस फर्जीवाड़े में वनकर्मी समेत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी भी शामिल है इस बड़े फर्जीवाड़े में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी द्वारा अपने पत्नी बच्चे एवं अन्य रिश्तेदारों के बैंक खाता नंबर अंकित कर घोर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है . बतौर उदाहरण माह जनवरी 2020 से जून 2023 के मध्य दैनिक वेतन भोगी श्रमिक दीपक शर्मा द्वारा अपनी पत्नी राधा शर्मा (हाउस वाइफ) के स्टेट बैंक इंडिया के खाता क्रमांक 34617702328 तथा एचडीएफसी बैंक खाता क्रमांक 50100325297098 द्वारा मजदूर बैंक सूची में मजदूरों के नाम के आगे मजदूरों के बैंक खाता नंबर के स्थान पर उक्त खाता नंबर अंकित कर जालसाजी करते हुए करोड़ो रूपये शासकीय राशि की हेराफेरी कर आदिवासी अंचल के आम जनता की आंखों में धूल झोंककर गरीब आदिवासी मजदूरो के ।मजदूरी राशि को हड़पने का कार्य किया गया है।उक्त दैनिक कर्मचारी द्वारा इस तरह फर्जीवाड़ा कर करोड़ो की बेनामी चल अचल संपत्ति अर्जित की गई है .

भ्रष्टाचार के आंकठ तक डूबा वनअमला : –

सवाल यह उठता है कि जब एक दैनिक भोगी कर्मचारी भ्रष्टाचार कर करोड़ो की बेनामी संपत्ति बनाया तो अंदाजा लगाइए की रेगुलर कर्मचारी और अधिकारी मामले में कितना बड़ा घोटाला किये होंगे इसी लिए इसकी विस्तृत जांच एवं दोषियों पर कार्रवाही के साथ साथ ऐसे प्रकरणों में अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर द्वारा तीन बार जांच समिति गठित की गई मगर मामले में अब तक जांच न कराकर मामले को दबाने के लिए लीपापोती की जा रही है वही भ्रष्टाचार का यह पूरा मामला सदन में उठा जिसके बाद विभाग के अधिकारी कर्मचारी सकते में है .

घोटाले में पर्दा डालने के लिए डीएफओ द्वारा गुमराह कर आयकर से जांच कराए जाने की सिफारिश : –

उल्लेखनीय है कि पूरा मामला वन विभाग के हुए भ्रष्टाचार और मजदूरों की राशि घोटाले से जुड़ा हुआ है जिसमे बैंक मजदूर सूची में हेराफेरी कर घोटाले को अंजाम दिया गया है चुंकि मजदूर बैंक सूची में सूची बनाने वाले वनरक्षक , डिप्टी रेंजर , रेंजर के हस्ताक्षर एवं एसडीओ स्तर के अधिकारियों से सत्यापन कराया जाता है . ऐसे में हस्ताक्षर करने वाले सभी अधिकारी/कर्मचारी भी इस घोटाले की परिधि में आएंगे इसलिए मामले में लीपापोती कर मामले को गुमराह करने के उद्देश्य से डीएफओ मरवाही द्वारा आयकर विभाग से जांच कराए जाने की सिफारिश की गई है जो नियमतः गलत है .

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर द्वारा इसकी कंडिका वार जांच करने का निर्देश दस माह पूर्व दिया गया है . डीएफओ द्वारा उच्चाधिकारियों के निर्देश को दरकिनार कर मामले को दस माह से लंबित रखा गया है चूंकि मामले में अगर विस्तृत जांच कराई जाती है तो नीचे से लेकर ऊपर के अधिकारियों की पोल खुल जाएगी और दैनिक श्रमिक के साथ-साथ इन अधिकारियों/कर्मचारियों पर भी गाज गिरेगी इस गाज से बचने के लिए इस तरह से विभाग द्वारा जांच न कर आयकर विभाग का हवाला देकर घोटाले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है . इसी प्रकार सिचिंत छतिपूर्ति रोपण लटकोनीखुर्द एवं डुमरखेरवा में विगत वर्ष पानी सिंचाई एवं निदाई कार्य मे लगे मजदूरों की मजदूरी राशि भी वनमंडल कार्यालय से निकलवाकर कुछ राशि टैंकर वालो को देकर शेष राशि उक्त लोगो के द्वारा हड़प ली गई मजदूरों को आज पर्यन्त तक मजदूरी भुगतान नही किया गया है .

वही इन बड़े घोटालो तथा जालसाज गिरोह पर शक्ति से कार्रवाही के उद्देश्य से मामला विधानसभा सत्र में जवाब तलब के लिए लाया गया है देखना होगा कि वनाधिकारी इस प्रकरण में विधानसभा को गुमराह करने में कितना सफल होते है या फिर इस मामले की गंभीरता को समझते हुए विधानसभा इन पर क्या कार्रवाही करता है .

Anil Mishara

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