छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अध्यक्ष पद की घमासान जंग: बघेल, सिंहदेव, दीपक और देवेंद्र यादव आमने-सामने…कौन होगा अगला अध्यक्ष….?

छत्तीसगढ़ उजाला……..
सियासत
रायपुर, 13 जुलाई 2026
कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर आंतरिक कलह तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज और अब युवा चेहरा देवेंद्र यादव — चारों नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं। पार्टी हाईकमान दिल्ली से फैसला लेने वाला है, लेकिन राज्य इकाई में खींचतान साफ नजर आ रही है।2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस में असंतोष बढ़ गया था। भूपेश बघेल की सरकार के बाद दीपक बैज को अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन उनका कार्यकाल विवादों और संगठनात्मक कमजोरियों से घिरा रहा। अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच अध्यक्ष पद पर नई जंग शुरू हो गई है।

दावेदारों की दावेदारी और ताकत
भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में अभी भी बड़े जनाधार वाले नेता।
उनका गुट अध्यक्ष पद पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
बघेल समर्थक अनुभव और जनसमर्थन को अपना हथियार बता रहे हैं।
टीएस सिंहदेव
OBC चेहरा और संगठन में मजबूत पकड़।
युवा नेताओं को तरजीह देने और पार्टी को नई दिशा देने की बात करते हैं।
उनका गुट 2027 में वापसी का दावा कर रहा है।शांत और सरल स्वभाव के साथ जनता में अच्छी इमेज।
दीपक बैज वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष:
वर्तमान अध्यक्ष और आदिवासी चेहरा।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और संगठन को संभालने का अनुभव।
कार्यकाल बढ़ाने या मजबूत पद की मांग कर रहे हैं।
देवेंद्र यादव (युवा चेहरा)
कांग्रेस के युवा और ऊर्जावान चेहरे के रूप में उभर रहे हैं।युवा और छात्र राजनीति से जुड़े होने के कारण नए वोटरों और युवा वर्ग को आकर्षित करने का दावा।देवेंद्र यादव गुट का तर्क है कि पुरानी पीढ़ी के बाद अब युवा नेतृत्व की जरूरत है, जो पार्टी को नई ऊर्जा दे सके। उनका समर्थन युवा कार्यकर्ताओं और कुछ जिला इकाइयों में मजबूत माना जा रहा है।वही बाबा के समर्थक उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग भी करने लगे।सभी नेताओं के समर्थक अपने अपने नेता के लिए माहौल बनाने के लगे हुए है।

खींचतान के पीछे के कारण
गुटबाजी: कांग्रेस में कई नेताओं के गुट लंबे समय से एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।सब अपनी चलाने की इच्छा रखते है।इसी खेल में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई थी।भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरण दास महंत,दीपक बैज,देवेंद्र यादव सभी अपना वर्चस्व चाहते है।अब हाईकमान किसको आगे करेगा यह देखना बाकी है।कांग्रेस में एक बात की चर्चा जोरो पर है कि इस बार युवा नेतृत्व को आगे लाया जाए।इस हिसाब से इनका आपसी विवाद खुलकर सामने आयेगा।
2027 की रणनीति: अध्यक्ष पद पर कब्जा करने वाला नेता संगठन पर पकड़ बनाकर चुनावी तैयारियों में अहम भूमिका निभा सकेगा।
सामाजिक संतुलन: OBC, आदिवासी और युवा चेहरे के बीच संतुलन बनाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।
दिल्ली का फैसला: राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की टीम किसी एक को समर्थन दे सकती है, जिससे बाकी गुट नाराज हो सकते हैं।यह खींचतान कांग्रेस को अंदर से कमजोर कर रही है। भाजपा पहले से ही “कांग्रेस में गुटबाजी और अस्थिरता” का मुद्दा उठा रही है। अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो 2027 की तैयारियां प्रभावित होंगी और कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ेगी।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अध्यक्ष पद की यह जंग व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से आगे बढ़कर पार्टी के भविष्य से जुड़ी हुई है। भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, दीपक बैज और देवेंद्र यादव — चारों दावेदारों की दावेदारी कांग्रेस के लिए चुनौती और अवसर दोनों साबित हो सकती है।दिल्ली को जल्द फैसला लेना होगा, वरना आंतरिक कलह 2027 में कांग्रेस को और नुकसान पहुंचा सकती है। युवा चेहरा देवेंद्र यादव की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब देखना होगा कि हाईकमांड किसे तरजीह देता है। कांग्रेस की इसी कमजोरी का फायदा भाजपा लेने में आगे रहती है।कांग्रेस की आपसी खींचतान को लेकर भाजपा के नेता अकसर चुटकी लेते रहते हैं।अब कांग्रेस अपना अध्यक्ष किसको बनाती है यह देखना बाकी है।




