
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-बिलासपुर के पत्रकारों ने हाल ही में दो पत्रकारों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में पत्रकारों ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रामगोपाल गर्ग और कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा तथा पत्रकार सुरक्षा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
पत्रकारों ने कहा कि पत्रकार जिया खान और अनुज श्रीवास्तव के विरुद्ध बिना निष्पक्ष जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए एफआईआर दर्ज किए जाने से पूरे पत्रकार समुदाय में भय और असुरक्षा का वातावरण निर्मित हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन द्वारा निर्धारित पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक-2023 तथा पूर्व से जारी पुलिस एवं गृह विभाग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि सिविल लाइन थाना, बिलासपुर के पुराने भवन का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। वीडियो में थाना परिसर के एक कमरे में वर्दी पहने आरक्षक मनोज साहू जमीन पर सोते हुए दिखाई दे रहे थे, जबकि दूसरे कमरे में बीयर और शराब की बोतलें रखी हुई नजर आ रही थीं। बताया गया कि यह वीडियो लगभग तीन महीने पुराना था।
इस वीडियो को आधार बनाकर सीजी भास्कर सहित कई मीडिया संस्थानों ने समाचार प्रकाशित किया। खबरों में पुलिस प्रशासन का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।
इसके दो दिन बाद आरक्षक मनोज साहू और चाय दुकान संचालक सोनू सिंह के बीच कथित बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। ऑडियो में वीडियो सार्वजनिक नहीं करने के एवज में एक लाख रुपये मांगने का दावा किया गया। इसी आधार पर सिविल लाइन पुलिस ने आरक्षक रितेश मिश्रा, पत्रकार जिया खान, पत्रकार अनुज श्रीवास्तव और सोनू सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।
पत्रकारों का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने से पहले न तो पत्रकार जिया खान और अनुज श्रीवास्तव का बयान लिया गया और न ही उनका पक्ष जाना गया। साथ ही कथित वसूली से जुड़े किसी स्वतंत्र साक्ष्य, दस्तावेज, ऑडियो या वीडियो की निष्पक्ष जांच की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई।
पत्रकारों का आरोप है कि विस्तृत जांच के बिना सीधे आपराधिक प्रकरण दर्ज करना प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के विपरीत है।
ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकारों से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए शासन स्तर पर समिति गठित किए जाने का प्रावधान है। इस समिति में एक पुलिस अधिकारी, जनसंपर्क विभाग का प्रतिनिधि तथा कम से कम 12 वर्ष का अनुभव रखने वाले तीन वरिष्ठ पत्रकार शामिल होने चाहिए, जिनमें एक महिला पत्रकार का होना भी आवश्यक है।पत्रकारों का दावा है कि जिया खान और अनुज श्रीवास्तव के मामले में ऐसी किसी समिति द्वारा जांच कराए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पत्रकारों की प्रमुख मांगे
पत्रकार जिया खान और अनुज श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज प्रकरण को निर्धारित समिति को सौंपकर तीन दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
यह स्पष्ट किया जाए कि पत्रकार सुरक्षा संबंधी शासन निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
भविष्य में पत्रकारों के खिलाफ किसी भी शिकायत पर पहले समिति से जांच कराई जाए और जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाए।
बिलासपुर जिले में पत्रकार सुरक्षा समिति की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
पत्रकार समुदाय ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दोषी व्यक्ति को संरक्षण देने के पक्ष में नहीं है और यदि कोई पत्रकार दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कार्रवाई से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है।
पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर शासन द्वारा निर्धारित समिति से जांच प्रारंभ नहीं की गई और पत्रकार सुरक्षा प्रावधानों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो 15 जून 2026 से चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन और जनजागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आईजी रामगोपाल गर्ग और कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पत्रकार प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पत्रकारों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा तथा मामले में नियमानुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी




