
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने विभाग के चार वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपते हुए आदेश जारी किया है। मंत्रालय से 10 जून को जारी इस आदेश के बाद वन्यजीव प्रबंधन, कैम्पा (CAMPA) और वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान समेत कई अहम इकाइयों की कमान नए अधिकारियों के हाथों में पहुंच गई है।
बताया जा रहा है कि पीसीसीएफ अरुण पांडेय के कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभागीय कार्यों को और प्रभावी बनाने के लिए अनुभवी अधिकारियों की नई टीम तैयार की जा रही है। फिलहाल सरकार ने नियमित नियुक्तियों के बजाय अतिरिक्त प्रभार के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का फैसला किया है।
1992 बैच के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी कौशलेन्द्र कुमार, जो वर्तमान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुश्रवण एवं मूल्यांकन) के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें अब छत्तीसगढ़ राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव का लाभ अनुसंधान एवं प्रशिक्षण गतिविधियों को नई गति देने में मिलेगा।
1995 बैच के आईएफएस अधिकारी ओपी यादव को विभाग ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अब वे प्रभारी प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण) के साथ-साथ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) का दायित्व भी निभाएंगे। अब राज्य में वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जैव विविधता से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका निर्णायक होगी।
2001 बैच की वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी शालिनी रैना को भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। प्रशासन एवं समन्वय से जुड़े दायित्व निभा रहीं शालिनी रैना को अब कैम्पा (CAMPA) का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। CAMPA के तहत संचालित करोड़ों रुपये की विकास एवं संरक्षण परियोजनाओं की निगरानी अब उनके जिम्मे होगी।
2006 बैच के अधिकारी माथेश्वरन व्ही. को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वे पहले से वन्यजीव प्रबंधन, योजना, जैव विविधता बोर्ड और राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण से जुड़े कार्य देख रहे हैं। अब उन्हें विकास एवं योजना, बजट, लेखा तथा लेखा परीक्षा से संबंधित अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इससे विभाग में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
जारी आदेश से स्पष्ट है कि वन विभाग ने फिलहाल नियमित नियुक्तियों के बजाय अनुभवी अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। इससे विभागीय कार्यों में रुकावट नहीं आएगी और महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी बनी रहेगी। हालांकि, आने वाले समय में इन पदों पर स्थायी नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।
फिलहाल इतना तय है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग की कमान अनुभवी अधिकारियों के हाथों में और मजबूत होती नजर आ रही है, जिसका असर वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर देखने को मिल सकता है।



