
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बिलासपुर जिले में इन दिनों भाजपा के भीतर बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। एक दौर था जब जिले की सत्ता, संगठन और राजनीतिक गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का निवास माना जाता था। भाजपा संगठन से लेकर प्रशासनिक निर्णयों तक उनकी मजबूत पकड़ की चर्चा प्रदेशभर में होती थी।
लेकिन समय के साथ राजनीति की धारा बदली और सत्ता के केंद्र भी बदलते गए। वर्तमान में बिलासपुर प्रदेश को उपमुख्यमंत्री के रूप में प्रतिनिधित्व दे रहा है। अरुण साव सरकार और संगठन दोनों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं, फिर भी राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिले की राजनीति अब किसी एक चेहरे या एक केंद्र तक सीमित नहीं रह गई है।
इसी बीच भाजपा की स्थानीय राजनीति में एक ऐसे नाम की चर्चा तेजी से बढ़ी है, जिसकी पृष्ठभूमि पारंपरिक राजनीति से नहीं बल्कि कारोबार की दुनिया से जुड़ी रही है। कोयला व्यापार से जुड़े इस उद्योगपति की सक्रियता पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा भी रही है कि उन्होंने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा टिकट हासिल करने के लिए प्रयास किए थे, हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उस समय उन्हें अवसर नहीं दिया।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले केंद्रीय एजेंसियों और आयकर विभाग की कार्रवाई के चलते भी यह कारोबारी सुर्खियों में रहा था। बावजूद इसके, उसकी राजनीतिक सक्रियता में कमी नहीं आई और अब उसे लेकर नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें लगाई जा रही हैं।
हाल ही में बिलासपुर दौरे पर आए केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री के कार्यक्रम ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया। मंत्री के शहर प्रवास के दौरान उक्त कारोबारी के निवास पहुंचने और वहां आतिथ्य स्वीकार करने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। भाजपा के भीतर और बाहर दोनों जगह यह सवाल उठने लगा कि क्या बिलासपुर में कोई नया राजनीतिक शक्ति केंद्र आकार ले रहा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा जैसे अनुशासित और बड़े संगठन में अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व और संगठन ही करता है, लेकिन स्थानीय राजनीति में प्रभाव, संसाधन, संपर्क और सक्रियता की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में कोयला कारोबार से जुड़े इस नए चेहरे की बढ़ती मौजूदगी ने भाजपा की स्थानीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह सक्रियता भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक परिवर्तन का संकेत है या केवल चर्चाओं तक सीमित रहेगी। लेकिन इतना तय है कि बिलासपुर भाजपा में बदलते समीकरणों और उभरते नए चेहरों ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह चर्चा सिर्फ सियासी गलियारों तक सीमित रहती है या फिर जिले की राजनीति में वास्तव में किसी नए शक्ति केंद्र का उदय होता है।




