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छत्तीसगढ़ में बढ़ी स्कूल फीस: नए शिक्षा सत्र 2026-27 से सरकारी स्कूलों में स्थानीय शुल्क में इजाफा, अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र 2026-27 से सरकारी हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब ज्यादा स्थानीय शुल्क देना होगा। राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग की अनुशंसा पर विभिन्न स्थानीय शुल्कों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के हजारों अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूलों में आयोजित होने वाली शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के संचालन में बढ़ते खर्च को देखते हुए शुल्क संशोधन का प्रस्ताव भेजा था। विज्ञान प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाली सामग्री, खेल उपकरण, परीक्षा सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों की बढ़ती कीमतों को आधार बनाकर यह निर्णय लिया गया है। प्रशासकीय समिति की अनुशंसा के बाद राज्य शासन ने शुल्क वृद्धि को स्वीकृति प्रदान कर दी।

नए आदेश के अनुसार हाईस्कूल स्तर पर कई मदों में शुल्क बढ़ाया गया है—
कार्यकलाप शुल्क: 50 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये
निर्धन छात्र सहायता निधि: 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये
विज्ञान क्लब निधि: 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये
बलचर निधि: 50 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये
क्रीड़ा निधि: 50 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये
विज्ञान प्रायोगिक शुल्क: 50 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये
हालांकि रेडक्रॉस निधि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और यह पहले की तरह 30 रुपये ही रहेगी।

उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी शुल्क में वृद्धि की गई है—
कार्यकलाप शुल्क: 50 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये
निर्धन छात्र सहायता निधि: 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये
विज्ञान क्लब निधि: 20 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये
बलचर निधि: 50 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये
क्रीड़ा निधि: 65 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये
विज्ञान प्रायोगिक शुल्क: 70 रुपये से बढ़ाकर 85 रुपये
यहां भी रेडक्रॉस निधि 30 रुपये ही रखी गई है।

स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ रही है। विज्ञान प्रयोगशालाओं की सामग्री, खेल उपकरण और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सीमित और आवश्यक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शुल्क में आंशिक वृद्धि की गई है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार बढ़े हुए शुल्क का उपयोग स्कूलों में प्रयोगशाला सामग्री खरीदने, खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में किया जाएगा।

फीस वृद्धि की खबर सामने आने के बाद कई अभिभावकों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले से ही शिक्षा, परिवहन और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क परिवार के बजट पर सीधा असर डालेगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चुनौती बन सकती है।
कुछ अभिभावकों ने यह भी मांग की है कि यदि शुल्क बढ़ाया जा रहा है तो स्कूलों में सुविधाओं और संसाधनों में भी स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलना जरूरी है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि सभी स्कूलों को निर्देश दिए जाएंगे कि शुल्क वृद्धि से संबंधित जानकारी अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बढ़े हुए शुल्क का उपयोग केवल निर्धारित मदों में ही किया जाए।

नए शिक्षा सत्र में संशोधित शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद इसका असर राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर देखने को मिलेगा। फिलहाल स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग आगामी सत्र की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

प्रशांत गौतम

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