*भाजपा युवा नेता की गुंडागर्दी : पटवारी को दफ्तर से निकलकर डंडों से पिटा, वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर हो रहा वायरस*
छत्तीसगढ़ उजाला - प्रतीक सोनी

अंबिकापुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। सरगुजा जिले के दरिमा तहसील के कंठी हल्का में पदस्थ पटवारी प्रकाश मंडल के साथ भाजपा नेता मोनू कुजूर द्वारा खुलेआम मारपीट की गई। इस पूरी घटना का वीडियो अब इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। घटना से जिले के पटवारियों में नाराजगी है। अब वे आंदोलन की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार पटवारी प्रकाश मंडल अपने कंठी स्थित कार्यालय में नियमित कार्य कर रहे थे। इसी दौरान मोनू कुजूर अपने कुछ सहयोगियों के साथ वहां पहुंचा।
दफ्तर से सड़क तक पीछा कर डंडे से हमला
किसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि उसने अचानक पटवारी पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यालय के अंदर शुरू हुई मारपीट बाहर सड़क किनारे तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि जब पटवारी कार्यालय से बाहर निकले, तब भी आरोपित ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और डंडे से लगातार पिटाई करता रहा। भयभीत पटवारी इधर-उधर भागते रहे, लेकिन हमलावर ने बेरहमी से मारपीट जारी रखी। यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
आरोपित भाजपा मंडल अध्यक्ष, पहले भी रहा विवादों में
मारपीट करने वाला मोनू कुजूर उर्फ जितेंद्र, करजी खर्रा का निवासी बताया जा रहा है और वर्तमान में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा मंडल दरिमा का अध्यक्ष है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह पहले भी विवादित और आपराधिक घटनाओं में शामिल रहा है। घटना के बाद जिले भर के पटवारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। पटवारियों ने इसे केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे राजस्व अमले की गरिमा पर हमला माना है।
पटवारियों की आंदोलन की चेतावनी और कलेक्टर से मुलाकात
आक्रोशित पटवारियों ने गरिमा थाना में शिकायत दर्ज कराई है और सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए पटवारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इस संबंध में एक आपात बैठक बुलाई जा रही है, जिसमें आगामी रणनीति तय की जाएगी। इसके पहले गुरुवार को जिले के सभी पटवारी कलेक्टर सरगुजा से मुलाकात कर अपनी सुरक्षा और आरोपित पर कार्रवाई की मांग करेंगे। पटवारियों का कहना है कि दिनदहाड़े इस तरह की गुंडागर्दी न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि शासकीय कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता की बात है।

