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“बिलासपुर: फिल पावर प्लांट में खौफनाक फर्नेस ब्लास्ट—इंडक्शन भट्ठी फटी, क्रेन ऑपरेटर 60% झुलसा, हालत बेहद नाजुक”

बिलासपुर:(छत्तीसगढ़ उजाला)
न्यायधानी बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र स्थित निरतू-घुटकू के फिल पावर प्लांट में शनिवार दोपहर एक भयावह औद्योगिक हादसा हो गया। प्लांट में इंडक्शन फर्नेस (भट्ठी) के अचानक फटने से वहां कार्यरत 26 वर्षीय क्रेन ऑपरेटर आशुतोष कुमार गंभीर रूप से झुलस गया। बिहार निवासी आशुतोष इस समय जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
आग और धुएं में फंसा युवक
हादसा इतना भीषण था कि आशुतोष आग की लपटों और जहरीले धुएं की चपेट में आ गया।
उसे तुरंत शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत अत्यंत गंभीर बताई है।
फेफड़ों में धुआं, 60% तक जला शरीर
डॉक्टरों के अनुसार—
युवक का शरीर करीब 60% तक झुलस चुका है
फेफड़ों में जहरीला धुआं भर जाने से सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है
स्थिति फिलहाल नाजुक और चिंताजनक बनी हुई है
पुलिस जांच शुरू, बयान का इंतजार
घटना की सूचना मिलते ही प्रशिक्षु IPS गगन कुमार मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
कोनी थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन घायल के बयान के बिना हादसे की असली वजह सामने नहीं आ सकी है।
टीआई भावेश शेंडे का बयान:
“हम अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों ने अभी बयान की अनुमति नहीं दी है। बयान के बाद ही स्पष्ट होगा कि सुरक्षा में कहां चूक हुई।”
प्रबंधन का बचाव—“बड़ा विस्फोट नहीं”
जहां एक ओर मजदूर जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं प्लांट प्रबंधन इसे बड़ा हादसा मानने से बचता नजर आया।
फिल ग्रुप के प्रबंधक प्रदीप झा के अनुसार—
कोई “बड़ा विस्फोट” नहीं हुआ
यह एक “सामान्य घटना” थी
घायल युवक ठेका कंपनी का कर्मचारी है
हालांकि, बेहतर इलाज के लिए रायपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाने की बात जरूर कही गई है।

घटना ने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या फर्नेस के पास काम करते समय सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा था?
क्या ऑपरेटर के पास जरूरी सुरक्षा उपकरण (PPE) थे?
क्या ठेका सिस्टम के कारण सुरक्षा मानकों से समझौता हो रहा है?
फिलहाल पुलिस आशुतोष के होश में आने का इंतजार कर रही है।
उसके बयान के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा था या सिस्टम की बड़ी चूक।
एक बड़ा सवाल अब भी बाकी है—क्या यह सिर्फ ‘हादसा’ है, या सुरक्षा में गंभीर लापरवाही का परिणाम?

प्रशांत गौतम

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