
रायपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को दो बहुचर्चित घोटालों—चिकित्सा उपकरण (री-एजेंट) खरीदी और भारतमाला परियोजना मुआवजा मामले—में बड़ी कार्रवाई करते हुए 103 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली गईं।
कुर्क की गई संपत्तियों में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में स्थित आलीशान मकान, भूखंड और फैक्ट्रियां शामिल हैं।
चिकित्सा उपकरण घोटाला: 80 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच
ईडी की जांच में सामने आया कि दुर्ग स्थित मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा ने स्वास्थ्य विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की।
🔹 फर्जी मांग दिखाकर उपकरण और री-एजेंट ऊंची कीमतों पर खरीदे गए
🔹 सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया गया
🔹 काली कमाई छिपाने के लिए कई फर्जी कंपनियां बनाई गईं
🔹 “प्रशिक्षण” के नाम पर फर्जी एग्रीमेंट कर नकद निकासी की गई
इस मामले में अब तक 123 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त हो चुकी है, जिसमें पोर्श और मर्सिडीज जैसी लग्जरी गाड़ियां भी शामिल हैं।
मुख्य आरोपी शशांक चोपड़ा फिलहाल रायपुर जेल में बंद है।
भारतमाला परियोजना घोटाला: जमीन मुआवजे में बड़ा खेल
रायपुर–विशाखापत्तनम राष्ट्रीय राजमार्ग (भारतमाला परियोजना) के तहत जमीन अधिग्रहण में भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
🔸 भू-माफियाओं और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत
🔸 राजस्व रिकॉर्ड में पिछली तारीखों में छेड़छाड़
🔸 जमीन मालिकों से खाली चेक और दस्तावेजों पर साइन करवाए गए
🔸 अधिसूचना के बाद जमीन का फर्जी उप-विभाजन कर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया
इस घोटाले के मुख्य आरोपी हरमीत सिंह खनूजा और उसके सहयोगियों पर ईडी ने शिकंजा कस दिया है।
ईडी की इस कार्रवाई से साफ है कि छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर हुए आर्थिक अपराधों पर अब सख्ती बढ़ रही है। दोनों मामलों में जांच जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।




