बैकुंठपुर क़े खांडा ग्राम पंचायत में शासकीय भूमि पर खुला कब्जा!
नामी डॉक्टर पर गरीबों के हक पर डाका डालने का गंभीर आरोप, प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

कोरिया/बैकुण्ठपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)
बैकुण्ठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खांडा में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और नियमों को ठेंगा दिखाकर पक्का भवन निर्माण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि बैकुण्ठपुर के नामी डॉक्टर श्री बंसरिया ने शासकीय भूमि पर कब्जा कर भवन निर्माण कराया और अब उसे व्यावसायिक उपयोग में लाकर किराया वसूला जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण पूरी तरह शासकीय भूमि पर स्थित है, इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे शासन-प्रशासन की निष्पक्षता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
गरीबों के नाम पर योजना, अमीरों के लिए सुविधा?
मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि शासकीय हैंडपंप, जो गरीब और जरूरतमंदों के लिए स्वीकृत था, उसे खुदवाकर समरसेबल पंप में तब्दील कर निजी उपयोग में लिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर यह सुविधा ली गई है, वहां आसपास एक भी गरीब परिवार का निवास नहीं है।अर्थात जिस योजना का उद्देश्य जनहित और पेयजल सुविधा था, वही योजना निजी लाभ का साधन बना दी गई।
गरीब करे तो कार्रवाई, रसूखदार करे तो छूट?
ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि यही काम कोई गरीब व्यक्ति करता, तो उसका मकान बिना देर किए तोड़ दिया जाता। लेकिन प्रभावशाली और नामी व्यक्ति होने के कारण संबंधित डॉक्टर को कथित रूप से खुली छूट दी जा रही है।
यह मामला साफ तौर पर दोहरी व्यवस्था और चयनात्मक कार्रवाई की ओर इशारा करता है, जहां कानून गरीब के लिए सख्त और प्रभावशाली के लिए लचीला नजर आ रहा है।
प्रशासन से जवाबदेही की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—शासकीय भूमि पर हुए अवैध कब्जे की निष्पक्ष जांच कराई जाए
अवैध निर्माण को तत्काल हटाया जाए
शासकीय भूमि को मुक्त कराया जाए
जनकल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग की जांच हो
दोषी व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन प्रभाव और रसूख से ऊपर उठकर कार्रवाई करेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।



