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आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कोडगार में धान तौल में बड़ी गड़बड़ी
शासन के निर्देशों की अनदेखी, किसानों से तय मानक से अधिक धान की वसूली
40.600–40.700 किलो के स्थान पर 41.200 किलो तक तौल, किसानों के पेट पर डाका


गौरेला–पेंड्रा–मरवाही(छत्तीसगढ़ उजाला)
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धान खरीदी को पारदर्शी, निष्पक्ष और किसान हितैषी बनाने के तमाम दावों के बावजूद आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, कोडगार के धान खरीदी केंद्र में गंभीर अनियमितता सामने आई है। यहां किसानों से शासन द्वारा निर्धारित मानक से अधिक धान की तौल ली जा रही है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
शासन के निर्देश बनाम जमीनी हकीकत
प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन की स्पष्ट मंशा एवं दिशा-निर्देश है कि एक बोरी धान की तौल 40.600 किलो से 40.700 किलो के बीच ही ली जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार का नुकसान न हो और खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।लेकिन कोडगार धान खरीदी केंद्र में इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
5 किसानों की तौल, 5 अलग-अलग मानक!
स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि धान तौल के दौरान एक ही समय पर 5 किसानों का धान तौला गया, लेकिन हर किसान की तौल अलग-अलग पाई गई।
कहीं 41.200 किलो, कहीं 41 किलो से अधिक, तो कहीं इससे भी अलग तौल बताई गई। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब शासन ने तौल का मानक तय कर रखा है, तो फिर हर किसान के लिए तौल अलग-अलग क्यों रखी जा रही है।
तय मानक से 500–600 ग्राम अधिक धान की वसूली
किसानों का कहना है कि प्रति बोरी 500 से 600 ग्राम अतिरिक्त धान उनसे लिया जा रहा है। कुल बोरी संख्या के हिसाब से देखें तो यह अंतर क्विंटल में तब्दील हो जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि अधिक तौल पर आपत्ति जताने पर खरीदी रोकने या देरी करने की बात कहकर दबाव बनाया जाता है, जिससे वे मजबूरी में अधिक धान देने को विवश हो जाते हैं।
किसानों के पेट पर सीधी मार
धान खरीदी किसानों की सालभर की मेहनत और आय का मुख्य आधार है। ऐसे में तौल में की जा रही यह कथित सेंधमारी सीधे-सीधे किसानों के पेट पर डाका डालने जैसी है। छोटे और सीमांत किसान, जो पहले से ही लागत और महंगाई की मार झेल रहे हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त बोझ असहनीय होता जा रहा है।

जब शासन ने स्पष्ट रूप से तौल का मानक तय कर दिया है,तो फिर उससे अधिक तौल लेना किस नियम के तहत जायज ठहराया जा सकता है?
क्या किसी समिति को अपने स्तर पर शासन के निर्देश बदलने का अधिकार है?
जांच की मांग तेज
किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, तौल मशीनों की तत्काल जांच, सीसीटीवी फुटेज खंगालने तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही किसानों से अतिरिक्त ली गई धान की भरपाई कराने की भी मांग उठाई जा रही है।

प्रशांत गौतम

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