
बिलासपुर(छत्तीसगढ़ उजाला)
दुर्ग नगर निगम से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां निगम कमिश्नर पर अधीनस्थ कर्मचारी से निजी काम कराने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि कमिश्नर ने कर्मचारी से व्हाट्सएप मैसेज के जरिए फिल्म की टिकट, फल, चावल और बंगले में लगे वाई-फाई का रिचार्ज तक करवाया। इसके बाद उसी कर्मचारी को निलंबित कर सेवा से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
इस मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निगम कमिश्नर की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है और कमिश्नर सहित राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
व्हाट्सएप चैट बनी कार्रवाई की बुनियाद
निलंबित कर्मचारी ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करते हुए निगम कमिश्नर के साथ हुई व्हाट्सएप चैट की फोटो कॉपी भी प्रस्तुत की है। इन चैट्स में कमिश्नर द्वारा की गई कथित मांगें दर्ज हैं—
“लाल अंगूर लेकर आओ”
“धुरंधर मूवी की टिकट, वो भी कार्नर सीट”
“10 किलो जायफूल चावल लेकर आओ”
“बंगले के वाई-फाई का रिचार्ज करा देना”
एक कर्मचारी के संबंध में संदेश — “उसको समझा देना, हटा दूंगा”
एमआईसी की बैठक कैंसिल कराने से संबंधित चर्चा
याचिका में कहा गया है कि जिस कर्मचारी से इस तरह निजी कार्य कराए गए, उसी के खिलाफ बाद में अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी गई।
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद कहा कि—
“जांच अधिकारी ने आरोप पत्र में सूचीबद्ध किसी भी गवाह से पूछताछ नहीं की। जांच की प्रक्रिया गंभीर संदेह के घेरे में है।”
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी अनुशासनात्मक कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
निलंबन और जांच रिपोर्ट को दी चुनौती
याचिकाकर्ता ने निगम कमिश्नर द्वारा 18 सितंबर 2025 को जारी आरोप पत्र और दुर्ग नगर निगम के उपायुक्त द्वारा 6 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को चुनौती दी है।
याचिका के अनुसार—
वर्ष 2014 में याचिकाकर्ता की नियुक्ति चपरासी पद पर हुई
2019 में सहायक ग्रेड-3 पद पर पदोन्नति मिली,कमिश्नर ने 31 जुलाई 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी किया,आरोप लगाया गया कि कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति व पदोन्नति अवैध है,जवाब देने के बावजूद 7 अगस्त 2025 को मनमाने ढंग से निलंबन कर दिया गया!याचिकाकर्ता का कहना है कि वह केवल प्रभारी क्लर्क के रूप में फाइल प्रस्तुत करता था, नियुक्ति या पदोन्नति का अंतिम अधिकार उसके पास नहीं था।
23 फरवरी को अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की है। निगम कमिश्नर सहित राज्य शासन को तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारियों द्वारा शक्ति के कथित दुरुपयोग और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब सबकी निगाहें हाई कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं।




