छत्तीसगढ

अश्लील कार्यक्रम की अनुमति देना पड़ा भारी
डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम तत्काल निलंबित, प्रशासन में हड़कंप


रायपुर/गरियाबंद(छत्तीसगढ़ उजाला)
गरियाबंद जिले में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में कथित अश्लील नृत्य आयोजित किए जाने का मामला अब प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद बन गया है। रायपुर संभाग आयुक्त ने कड़ी कार्रवाई करते हुए डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम (रा.प्र.से.) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के गंभीर उल्लंघन को लेकर की गई है।
अनुमति से शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम उस समय मैनपुर, जिला गरियाबंद में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पद पर पदस्थ थे। उनके द्वारा ग्राम उसमाल, थाना देवभोग, तहसील अमलीपदर, विकासखंड मैनपुर में 5 से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित तथाकथित ‘ओपरा’ (नृत्य, नाटक एवं संगीत) कार्यक्रम को सांस्कृतिक गतिविधि बताते हुए अनुमति प्रदान की गई थी।
हालांकि जांच में यह सामने आया कि कार्यक्रम के दौरान खुलेआम अश्लील नृत्य प्रस्तुत किए गए, जो सार्वजनिक मर्यादा और शासन के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
9 जनवरी 2026 की रात कार्यक्रम में हुए अश्लील नृत्य के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इसके साथ ही कार्यक्रम से जुड़े छायाचित्र स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुए, जिससे प्रशासन की छवि पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए।
आरोप है कि उक्त रात डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम स्वयं भी कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे, इसके बावजूद न तो कार्यक्रम रोका गया और न ही अश्लीलता पर नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी कदम उठाया गया।
जांच में उजागर हुए गंभीर तथ्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर गरियाबंद द्वारा विस्तृत जांच कर 14 जनवरी 2026 को कलेक्टर को जांच प्रतिवेदन सौंपा गया। रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति से संबंधित शासन के निर्देशों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि 29 दिसंबर 2025 को जारी अनुमति आदेश विधिसम्मत नहीं था और नियमों के विपरीत जाकर जारी किया गया।
कारण बताओ नोटिस भी रहा बेअसर
कलेक्टर गरियाबंद द्वारा 11 जनवरी 2026 को डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। मरकाम ने 14 जनवरी को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन परीक्षण के बाद उसे असंतोषजनक माना गया।
जवाब में आरोपों का ठोस और तथ्यात्मक खंडन नहीं हो सका, जिससे उनकी भूमिका पर संदेह और गहरा गया।
आचरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन
जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि डिप्टी कलेक्टर का कृत्य कर्तव्यपरायणता, निष्पक्षता और प्रशासनिक मर्यादा के प्रतिकूल है। यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।
आयुक्त का सख्त फैसला
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए रायपुर संभाग आयुक्त ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9(1)(क) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए डिप्टी कलेक्टर तुलसीदास मरकाम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला कार्यालय बलौदाबाजार-भाटापारा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
प्रशासन के लिए सख्त संदेश
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए कड़ा संदेश है कि सार्वजनिक मर्यादा, सांस्कृतिक मूल्यों और शासन के नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे और कार्रवाई संभव
आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। साथ ही इस प्रकरण में विभागीय जांच और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रारंभ किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

प्रशांत गौतम

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