कोरबाछत्तीसगढ

एक परियोजना अधिकारी के भरोसे तीन-तीन परियोजनाएं, आकांक्षी जिला कोरबा में महिला एवं बाल विकास विभाग बेहाल


कोरबा(छत्तीसगढ़ उजाला)
आकांक्षी जिला कोरबा में महिला एवं बाल विकास विभाग शासन की उपेक्षा और अदूरदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था का खामियाजा भुगतता नजर आ रहा है। जिले की कुल 10 परियोजनाओं में से 4 परियोजनाएं वर्तमान में परियोजना अधिकारी विहीन हैं। परिणामस्वरूप शेष अधिकारियों पर अतिरिक्त प्रभार डालकर विभागीय संचालन किसी तरह चलाया जा रहा है, जिस पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


चार परियोजनाएं बिना अधिकारी, अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम
जानकारी के अनुसार करतला, कटघोरा, पसान और चोटिया परियोजनाओं में नियमित परियोजना अधिकारी पदस्थ नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नजदीकी परियोजनाओं के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
करतला परियोजना का प्रभार → बरपाली परियोजना अधिकारी कीर्ति जैन
कटघोरा परियोजना का प्रभार → वरिष्ठ परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल
पसान एवं चोटिया परियोजना का प्रभार → पोंडी उपरोड़ा परियोजना अधिकारी निशा कंवर
सबसे ज्यादा चर्चा में पसान और चोटिया परियोजना है, जहां एक ही अधिकारी को तीन परियोजनाओं की बागडोर सौंप दी गई है। पसान का प्रभार पहले से निशा कंवर के पास था, अब हाल ही में चोटिया का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंप दिया गया।


एक अधिकारी से तीन परियोजनाओं का संचालन: कितना व्यवहारिक?
प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वित्तीय और योजनागत संचालन के लिहाज से भी एक परियोजना अधिकारी द्वारा तीन परियोजनाओं को संभालना व्यवहारिक नहीं माना जा रहा।
परियोजना स्तर पर वरिष्ठ पर्यवेक्षकों को प्रशासनिक जिम्मेदारी दिए जाने के बावजूद वित्तीय प्रभार संभालना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
पाली परियोजना अधिकारी को दिया जा सकता है पसान का प्रभार
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि अधिकारी चाहें तो पसान परियोजना का अतिरिक्त प्रभार पाली परियोजना अधिकारी को दिया जा सकता है।
पसान का बड़ा भू-भाग पाली परियोजना से सटा हुआ है, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी ज्यादा प्रभावी हो सकती है।
चोटिया भर्ती विवाद के बाद बदली गई जिम्मेदारी
चोटिया परियोजना में दो वर्ष पूर्व 76 रिक्त पदों (आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका) पर हुई भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर विवाद सामने आया था।महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती पूजा दुबे ने अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर तत्कालीन डीपीओ रेणु प्रकाश द्वारा 11 सितंबर 2025 को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी।पारदर्शी जांच के उद्देश्य से उस समय के परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल को चोटिया के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया था।
इसी दौरान कटघोरा में पदस्थ परियोजना अधिकारी द्वारा कोर्ट से स्टे ले लिए जाने के कारण वहां पद रिक्त हो गया, जिसके चलते कोरबा शहरी परियोजना अधिकारी मनोज अग्रवाल को कटघोरा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
हालांकि, जांच समिति द्वारा मांगी गई रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे विभागीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


बसंत मिंज, जिला परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, कोरबा (छ.ग.)
“परियोजना अधिकारियों के रिक्त पदों की पूर्ति जिला स्तर से संभव नहीं है। यह शासन स्तर पर किया जाना है। फिलहाल कोई अन्य विकल्प नहीं है, हालांकि पाली परियोजना अधिकारी को पसान का अतिरिक्त प्रभार देने पर विचार किया जाएगा।”

प्रशांत गौतम

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