
रायपुर/रायगढ़(छत्तीसगढ़ उजाला)
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में कोयला खदान खोले जाने को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस घटना के बाद सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस जहां जिला प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाया है।
तमनार दौरे से लौटने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पूर्व मंत्री शिव डहरिया और कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला के साथ रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
दीपक बैज ने कहा कि तमनार की घटना भाजपा की गांव, गरीब, किसान और आदिवासी विरोधी नीति का परिणाम है। उन्होंने 27 दिसंबर की घटना के लिए सीधे तौर पर जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि आंदोलनकारियों को साजिश के तहत कुचलने की रणनीति बनाई गई।
बैज ने आरोप लगाया कि कलेक्टर और एसपी कैंप में मौजूद होने के बावजूद धरने पर बैठे ग्रामीणों से किसी भी अधिकारी ने संवाद नहीं किया। उन्होंने बताया कि रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में जिंदल पावर कंपनी को कोल माइंस आवंटित की गई थी, जिसकी जनसुनवाई 8 दिसंबर को आयोजित की गई।
इसके विरोध में 5 दिसंबर से ही किसान और आदिवासी जनसुनवाई स्थगित करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। जनसुनवाई के दिन 14 गांवों के करीब 10 हजार से अधिक ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने आरोपों के अनुसार स्थल से दूर एक कोने में टेबल लगाकर चुपके से जनसुनवाई पूरी कर ली।
दीपक बैज ने जनसुनवाई में कोल कंपनी के कर्मचारियों से फर्जी हस्ताक्षर कराए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्रामीण विरोध कर रहे थे, तब चोरी-छिपे जनसुनवाई क्यों कराई गई और प्रशासन ने संवाद का रास्ता क्यों नहीं अपनाया।
27 दिसंबर की घटना को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जिंदल कंपनी की कोयले से भरी गाड़ियां रवाना की जा रही थीं, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। इस दौरान पुलिस कार्रवाई में करीब 40 लोगों की गिरफ्तारी हुई, महिलाओं के साथ अभद्रता की गई, आंसू गैस का प्रयोग हुआ और ग्रामीणों को प्रताड़ित किया गया, जिससे हालात बेकाबू हो गए।
पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने भी जनसुनवाई को फर्जी बताते हुए कहा कि 14 गांवों के ग्रामीणों ने इसका खुलकर विरोध किया था और कंपनी कर्मचारियों से जबरन हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की।
वहीं इस पूरे प्रकरण पर डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार मामले की गंभीरता से जांच कराएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार और प्रदेश के विकास—तीनों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य को राजस्व नहीं मिलेगा तो विकास कैसे होगा, इसलिए इस मुद्दे को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।




