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*SECL बलगी में कथित फर्जी नौकरी का मामला CMPF कार्यालय तक पहुंचा, ₹2.50 लाख के चेक ने बढ़ाए सवाल* *प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के दावे के बाद अब नियुक्ति, कथित गोदनामे और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग*

शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार झा का आरोप—शिकायत वापस लेने के लिए दिया गया चेक; चार महीने बाद उन्हीं के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज होने का दावा। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी।

 

कोरबा (छत्तीसगढ़ उजाला)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की एसईसीएल बलगी परियोजना में कार्यरत कर्मचारी दीनदयाल गुप्ता की नियुक्ति और कथित दस्तावेजी अनियमितताओं से जुड़ा मामला अब एक नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार झा के अनुसार, उन्होंने इस मामले में पहले पुलिस अधीक्षक, कोरबा के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। अब उनका दावा है कि शिकायत से संबंधित दस्तावेज और जांच की मांग कोल माइंस प्रोविडेंट फंड (CMPF) कार्यालय तक भी पहुंचाई गई है। शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंचने की बात भी कही है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

प्रवीण कुमार झा ने दीनदयाल गुप्ता की नियुक्ति, व्यक्तिगत पहचान, पिता के नाम, जाति संबंधी दस्तावेजों तथा कथित गोदनामे की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि विभागीय जांच के दौरान शिकायत वापस लेने के लिए उन्हें 2.50 लाख रुपये का चेक दिया गया था। दूसरी ओर, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में पुलिस, एसईसीएल और संबंधित विभागों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

20 दिसंबर 2024 को एसपी कोरबा के समक्ष की थी शिकायत
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने 20 दिसंबर 2024 को दीनदयाल गुप्ता के खिलाफ एसईसीएल में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त करने के आरोपों को लेकर पुलिस अधीक्षक, कोरबा के समक्ष शिकायत दी थी। शिकायत में कर्मचारी की पहचान, पिता के नाम और जाति से संबंधित दस्तावेजों में कथित विसंगतियों की जांच की मांग की गई थी।
झा का कहना है कि इस मामले में नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नौकरी प्राप्त करने के लिए दिए गए अभिलेख नियमानुसार और प्रमाणिक हैं या नहीं।

शिकायत वापस लेने के लिए ₹2.50 लाख का चेक देने का आरोप
प्रवीण कुमार झा का आरोप है कि विभागीय जांच के दौरान दीनदयाल गुप्ता की ओर से शिकायत वापस लेने के लिए चेक क्रमांक 338100 के माध्यम से 2,50,000 रुपये देने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, यह चेक भारतीय स्टेट बैंक से संबंधित था।

झा ने बताया कि परिवार के सदस्यों की सलाह के बाद उन्होंने चेक को भुगतान के लिए बैंक में प्रस्तुत नहीं किया। उनका आरोप है कि शिकायत वापस लेने के बदले रकम देने का कथित प्रयास पूरे मामले की गंभीरता बढ़ाता है।

हालांकि, चेक दिए जाने की परिस्थितियों, उसके उद्देश्य और इससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। केवल चेक उपलब्ध होने से अपने आप किसी रिश्वत या अनुचित लेन-देन की पुष्टि नहीं होती।

करीब चार महीने बाद शिकायतकर्ता के खिलाफ भी दर्ज हुआ मामला
शिकायतकर्ता के अनुसार, चेक दिए जाने के लगभग चार महीने बाद दीनदयाल गुप्ता की शिकायत पर प्रवीण कुमार झा के खिलाफ बाकीमोंगरा थाना, जिला कोरबा में अपराध क्रमांक 371/25 दर्ज किया गया। झा का आरोप है कि इस मामले में उन पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया।

प्रवीण कुमार झा का कहना है कि एसपी कार्यालय में प्रस्तुत कथित लिखित बयानों में एसईसीएल कर्मचारियों ने उनके साथ मुख्यालय के गेट के पास मुलाकात होने की बात कही थी, लेकिन पैसे के लेन-देन से इनकार किया था। शिकायतकर्ता ने इन बयानों को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण बताया है।

इस मामले में दर्ज अपराध की वास्तविक परिस्थितियों, संबंधित बयानों और दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों से होना जरूरी है। किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होने के समान नहीं है।

कथित गोदनामे और स्वर्गीय समरू के परिवार को लेकर भी सवाल
शिकायत में दीनदयाल गुप्ता द्वारा स्वर्गीय समरू को अपना दत्तक पिता बताए जाने के दावे पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष दिए गए कथन में समरू की कोई संतान नहीं होने और गोद लिए जाने की बात कही गई थी।

इसके विपरीत, प्रवीण कुमार झा का दावा है कि स्वर्गीय समरू के पुत्र और पुत्री जीवित हैं। उनका कहना है कि समरू के पुत्र ने वीडियो में किसी व्यक्ति को गोद दिए जाने से इनकार किया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस संबंध में पहचान संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।

इन परस्पर विरोधी दावों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए कथित गोदनामे की वैधता, संबंधित पारिवारिक अभिलेखों और अन्य प्रमाणित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

CMPF कार्यालय तक पहुंची शिकायत, दस्तावेजों की जांच की मांग
प्रवीण कुमार झा के मुताबिक, उन्होंने मामले को CMPF यानी कोल माइंस प्रोविडेंट फंड से संबंधित कार्यालय तक पहुंचाया है। शिकायतकर्ता चाहते हैं कि संबंधित विभाग उपलब्ध शिकायत और दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करे।

उन्होंने निम्नलिखित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है:

  • दीनदयाल गुप्ता का जन्म प्रमाण पत्र और पहचान से जुड़े अभिलेख।
  • कथित गोदनामा तथा उसे प्रमाणित करने वाले वैधानिक दस्तावेज।
  • भूमि अधिग्रहण और उससे संबंधित पारिवारिक अभिलेख।
  • एसईसीएल में नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज।
  • ₹2.50 लाख के कथित चेक और उससे जुड़ी परिस्थितियों की जांच।
  • दोनों पक्षों की शिकायतों, बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण।

अब जांच पर टिकी निगाहें
इस पूरे प्रकरण में एक ओर एसईसीएल कर्मचारी की नियुक्ति और दस्तावेजों को लेकर शिकायतकर्ता के आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता के खिलाफ रिश्वत मांगने का मामला दर्ज होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने अपनी शिकायत CMPF कार्यालय तक पहुंचाई है और संबंधित दस्तावेजों की जांच चाहते हैं।

फिलहाल ₹2.50 लाख के चेक के उद्देश्य, कथित गोदनामे, नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों और दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। दीनदयाल गुप्ता तथा संबंधित पुलिस और एसईसीएल अधिकारियों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

सबसे अहम सवाल यही है—क्या संबंधित विभाग नियुक्ति, कथित गोदनामे और चेक प्रकरण से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराएंगे? अब निगाहें पुलिस, एसईसीएल और संबंधित विभागीय कार्यालयों की कार्रवाई पर टिकी हैं।

नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी और उनके आरोपों पर आधारित है। आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने पर खबर को अद्यतन किया जाना चाहिए।

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