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मथुरा में दिव्यता और भव्यता के साथ संपन्न हुआ प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा का राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन

कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन एवं हिंदी विचार गोष्ठी में देशभर से जुटे साहित्यकार

मथुरा। प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा के तत्वावधान में मथुरा में आयोजित राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन दिव्यता, भव्यता और साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से साहित्यकारों, कवियों, कवयित्रियों, पत्रकारों एवं हिंदी प्रेमियों ने सहभागिता की। आयोजन के दौरान कवि सम्मेलन, सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन एवं लोकार्पण तथा हिंदी विचार गोष्ठी सहित विविध साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली से डॉ. धर्म प्रकाश वाजपेयी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दतिया के विनोद मिश्र ‘सुरमणि’ एवं कटनी के अनिल कुमार मिश्र उपस्थित रहे। हिंदी विचार गोष्ठी एवं साहित्यिक कार्यक्रम की अध्यक्षता जबलपुर की प्रभा बच्चन श्रीवास्तव ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ राधा-कृष्ण पूजन एवं वंदना के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत किया गया। मेरठ की सीमा शर्मा ने सरस्वती वंदना तथा भिलाई की सोनिया नायडू ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। जबलपुर की राजकुमारी रैकवार ‘राज’ एवं प्रभा बच्चन श्रीवास्तव ने राष्ट्रभक्ति पर आधारित मनोहारी नृत्य प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया।

राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को काव्य रस से सराबोर किया। आगरा की वीणा अब्राहम सिंह, गढ़वा झारखंड की जयपूर्णा विश्वकर्मा, रायबरेली के डॉ. राम लखन वर्मा ‘विद्यावाचस्पति’, भोपाल की नितिन शर्मा ‘नीति’, मथुरा के बेखुद ब्रजवासी, हरियाणा की डॉ. रमा कान्ता, भिलाई की सोनिया नायडू, नागपुर की मेघा अग्रवाल, आगरा के हास्य कवि राकेश शर्मा, गीतकार रामेन्द्र कुमार शर्मा ‘रवि’, गीतकार उमाशंकर पाराशर ‘आचार्य जी’, आगरा के प्रभुदत्त उपाध्याय सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।

इसके अलावा ग्वालियर से जगमोहन श्रीवास्तव, कमलेश कमल, सरिता चौहान, पुष्पा मिश्रा, संदीप खैरा एवं अनिल राही, मंडला की दीप्ति खरे, सिहोरा जबलपुर की सुषमा वीरेंद्र खरे ‘सरस’, दमोह की पदमा तिवारी, मंदसौर के कवि मुकेश निडर, मथुरा के रंजन मिश्र ‘विरागी’, खरगोन के डॉ. महेश ‘अनघड़’, भिंड के राघव कन्हौआ, बिलासपुर की डॉ. सुषमा पंड्या, उज्जैन के रफीक नागौरी, बुलंदशहर के कृष्णकांत कपासिया, आगरा की अनीता गौतम ‘विदुषी’, हाथरस के वीरेंद्र पाठक, मैनपुरी की रजनी वर्मा, मनासा के आशुकवि भैरु सुनार, मंदसौर के रामगोपाल फरक्या ‘खड़ावदा’, मैनपुरी के प्रांशू त्रिपाठी, सिहोरा/मथुरा की निर्मला डोंगरे, कोटियाल के सागर स्याल, लुधियाना के मौर्य ए.पी., भिलाई की शीशलता ‘शालू’, आगरा की मोहिनी भटनागर एवं रुपेश कुलश्रेष्ठ सहित बड़ी संख्या में कवियों-कवयित्रियों ने सहभागिता की।

सम्मेलन में दिल्ली के जयप्रकाश गौतम ‘बटोही’, प्रयागराज के डॉ. सोमनाथ शुक्ल एवं डॉ. राधेश्याम दुबे ‘श्याम फतनपुरी’, नोएडा के अजय शुक्ल, दिल्ली के डॉ. रामनिवास तिवारी, चंबल के शत्रुघ्न सिंह, पोरसा की रविना नरवरिया एवं हरिओम गुप्ता, राजस्थान के सुशील राठौड़, गोरखपुर के मृत्युंजय उपाध्याय ‘नवल’, गाजियाबाद के विनय कुमार झा, कानपुर की कुसुम सिंह ‘अविचल’, रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी, रायपुर जिले के विजय कुमार कन्नौजे ‘आमोदी आरंग’, बांदा के चन्द्रप्रकाश ‘व्यथित’, मथुरा के दिनेश कुमार पुरी, जबलपुर के डॉ. गोविन्द पाण्डेय ‘प्रेम’, कोटा के मधुसूदन गौतम, बीकानेर के डॉ. रामचन्द्र स्वामी, एटा के डॉ. ओम ऋषि भारद्वाज, आगरा के डॉ. राजेन्द्र मिलन, आगरा के यशोयश एवं निशि राज, दिल्ली के गोवर्धन थपलियाल, प्रतापगढ़ के डॉ. अशोक अग्रहरि, देहरादून की बीना नौडियाल खंडूरी, श्रीनगर पौड़ी गढ़वाल की किरन नैथानी, हैदराबाद की मनोमा ‘मनु’, सागर के डॉ. महेन्द्र सिंह गौर, वडोदरा गुजरात के नेमा खगेश के शाह, प्रयागराज के डॉ. विजयानन्द, रीवा के रामलखन गुप्त, नवाबगंज के डॉ. चैतन्य चेतन एडवोकेट, दमोह के ओजेन्द्र तिवारी, मधुबनी बिहार की सरस्वती मल्लिक तथा प्रयागराज के समाजसेवी बृज बिहारी त्रिपाठी सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्तर के इस कवि सम्मेलन का प्रभावी संचालन जबलपुर की सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ ने किया। उनके सधे हुए संचालन ने पूरे साहित्यिक आयोजन को निरंतरता और ऊंचाई प्रदान की। कवियों एवं कवयित्रियों की प्रस्तुतियों पर उपस्थित श्रोताओं ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।

आयोजन के अंत में दिल्ली के समाजसेवी अनिल शर्मा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों-कवयित्रियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन ने हिंदी भाषा, साहित्य और साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं साहित्यिक संवाद की भावना को मजबूत किया।

प्रशांत गौतम

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