पेंड्रा तहसील कार्यालय में शाम बाद किसका राज? तहसीलदार के जाने के बाद भी कार्यालय में बैठते हैं बाबू और कथित दलाल, भू-माफियाओं की आवाजाही पर उठे सवाल
जी.पी.एम.(छत्तीसगढ़ उजाला)-पेंड्रा तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि शाम के बाद तहसीलदार के कार्यालय से रवाना होने के बावजूद तहसील परिसर में बाबुओं और कथित दलालों की गतिविधियां देर रात तक जारी रहती हैं। इस दौरान जमीन से जुड़े दस्तावेजों को देखने और प्रकरणों में लेन-देन की चर्चा होने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य तौर पर शासकीय कार्यालय का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद आम लोगों की आवाजाही सीमित हो जानी चाहिए, लेकिन पेंड्रा तहसील कार्यालय में शाम ढलने के बाद भी कुछ लोगों की मौजूदगी और गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
तहसीलदार के जाने के बाद कौन लेता है फैसले?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तहसीलदार कार्यालय से जा चुके हैं, तो उनके बाद कार्यालय में बैठकर राजस्व प्रकरणों, जमीन संबंधी दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण कागजातों को कौन देख रहा है?
यदि बाबू कार्यालय में शासकीय कार्य के लिए मौजूद रहते हैं, तो क्या इसके लिए कोई आधिकारिक व्यवस्था या अनुमति है? और यदि बाहरी व्यक्ति अथवा कथित दलाल कार्यालय में बैठकर दस्तावेजों तक पहुंच बना रहे हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
भू-माफियाओं की कथित सक्रियता पर भी सवाल
पेंड्रा क्षेत्र में जमीन संबंधी मामलों को लेकर पहले भी विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में तहसील कार्यालय में शाम के बाद कथित रूप से जमीन कारोबार से जुड़े लोगों की सक्रियता को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, किसी अधिकारी, कर्मचारी या व्यक्ति की मिलीभगत अथवा लेन-देन की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
साथ ही यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि कार्यालय समय के बाद राजस्व संबंधी दस्तावेज किसके द्वारा देखे गए और क्या किसी प्रकरण में नियमों के विपरीत कोई कार्रवाई या लेन-देन हुआ है।
तहसीलदार और कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल
पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या यह केवल कर्मचारियों की मौजूदगी का मामला है या इसके पीछे कोई व्यवस्थित व्यवस्था चल रही है? यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अब निगाहें तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर हैं कि वे इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, कार्यालय उपस्थिति रजिस्टर और संबंधित राजस्व दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं।



