कलिंगा विश्वविद्यालय का कानूनी जागरूकता शिविर! उपभोक्ता अधिकारों पर कलिंगा विश्वविद्यालय की पहल, पलौद गांव में लगा कानूनी जागरूकता शिविर

घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को दी उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी, विद्यार्थियों को भी किया जागरूक; अधिवक्ता ने बताया शिकायत निवारण का रास्ता
रायपुर। (छत्तीसगढ़ उजाला) उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और ग्रामीण समुदाय तक कानूनी सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलिंगा विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने एक महत्वपूर्ण पहल की। विश्वविद्यालय के विधि संकाय (Faculty of Law) ने कानूनी सहायता प्रकोष्ठ (Legal Aid Cell) के सहयोग से 11 सितंबर 2026 को पलौद गांव में ‘उपभोक्ता जागरूकता एवं कानूनी अधिकार’ विषय पर कानूनी सहायता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को उपभोक्ता अधिकारों एवं कर्तव्यों, अनुचित व्यापार प्रथाओं, धोखाधड़ी से बचाव तथा उपभोक्ता शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक कानूनी जानकारी प्रदान करना था। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों को अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
विधि संकाय के मार्गदर्शन में छात्रों ने संभाली जागरूकता की जिम्मेदारी
कार्यक्रम का आयोजन विधि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. अज़ीमखान बी. पठान के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में संयोजिका सुश्री एकता चंद्राकर तथा संकाय समन्वयक सुश्री वंशिका कपूर, श्री प्रसून दुबे एवं श्री सौम्यदीप चक्रवर्ती के नेतृत्व में विधि के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
विद्यार्थियों ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का संचालन किया और कानूनी अधिकारों से संबंधित जानकारी सरल एवं सहज भाषा में साझा की।
घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों को बताए उपभोक्ता अधिकार
शिविर के तहत विधि के विद्यार्थियों ने पलौद गांव में घर-घर जाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्हें उपभोक्ता अधिकारों से संबंधित जानकारीपूर्ण पर्चे वितरित किए गए।
ग्रामीणों को खरीदारी के दौरान बिल लेना एवं उसे सुरक्षित रखना, अनुचित व्यापार प्रथाओं की पहचान करना, धोखाधड़ी से बचना तथा किसी भी प्रकार की उपभोक्ता शिकायत होने पर उचित मंच पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। साथ ही, कानूनी सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध तरीकों की जानकारी भी दी गई।
स्कूली विद्यार्थियों को भी किया जागरूक
जागरूकता अभियान के अंतर्गत स्थानीय स्कूल में विद्यार्थियों के लिए संवादात्मक कानूनी साक्षरता सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को उपभोक्ता संरक्षण, उनके अधिकारों और जिम्मेदार नागरिकता के महत्व से परिचित कराया गया।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में कम उम्र से ही कानूनी जागरूकता विकसित करना तथा उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग बनाना था।
अधिवक्ता कृष्णा कुमार सिन्हा ने दिया व्यावहारिक कानूनी मार्गदर्शन
शिविर में अधिवक्ता कृष्णा कुमार सिन्हा ने विशेष रूप से सहभागिता करते हुए ग्रामीणों को उपभोक्ता शिकायतों के निवारण और औपचारिक कानूनी उपचार प्राप्त करने की प्रक्रिया के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने ग्रामीणों को उपभोक्ता विवादों की स्थिति में उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी दी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक परामर्श प्रदान किया। इससे ग्रामीणों को उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को समझने में सहायता मिली।
ग्रामीणों की समस्याओं को समझने किया कानूनी सर्वेक्षण
कार्यक्रम के दौरान विधि के विद्यार्थियों ने सामुदायिक कानूनी सर्वेक्षण भी किया। इसके माध्यम से ग्रामीणों को रोजमर्रा के जीवन में आने वाली विभिन्न कानूनी चुनौतियों एवं समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया।
इस सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी भविष्य में कानूनी सहायता एवं जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों की योजना बनाने में उपयोगी साबित होगी। यह पहल ग्रामीण समुदाय की वास्तविक जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।
न्याय तक पहुंच और कानूनी सशक्तिकरण की दिशा में पहल
कलिंगा विश्वविद्यालय की इस पहल ने अकादमिक कानूनी शिक्षा और समाज की जमीनी आवश्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया। शिविर के माध्यम से न केवल ग्रामीणों को उनके उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया, बल्कि विधि के विद्यार्थियों को भी समाज के बीच जाकर व्यावहारिक कानूनी अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला।
विश्वविद्यालय के विधि संकाय ने इस आयोजन के माध्यम से न्याय तक पहुंच, उपभोक्ता जागरूकता, कानूनी सशक्तिकरण और समाजोन्मुखी कानूनी शिक्षा को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्यक्रम का समापन ग्रामीण समुदाय के हित में कानूनी सहायता एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियों को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ।



