सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग! सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज, सांसद संतोष पांडे से मिला शिक्षक संगठनों का प्रतिनिधिमंडल
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर उत्पन्न चिंता से कराया अवगत, संसद में मुद्दा उठाने की अपील; केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात कराने का सांसद ने दिया आश्वासन
रायपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)-सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल 18 सितंबर की शाम राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे से मिला। सांसद कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की समस्याओं, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से उत्पन्न चिंताओं तथा सेवा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करते हुए आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संगठन सचिव आलोक शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने सांसद संतोष पांडे के समक्ष सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त करने तथा उनके भविष्य और सेवा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से रखी। इस दौरान प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रांतीय प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक मनीष मिश्रा ने शिक्षकों की समस्याओं से संबंधित विस्तृत साक्ष्य और दस्तावेज सांसद को सौंपे।
30 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों की चिंता का उठाया मुद्दा
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि TET की अनिवार्यता के चलते देशभर के लगभग 30 लाख शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने भविष्य को लेकर चिंता और मानसिक पीड़ा की स्थिति निर्मित हुई है। वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने सेवा सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा है।
शिक्षक संगठनों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लंबे समय से अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों की योग्यता का आकलन केवल TET परीक्षा के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके वर्षों के शैक्षणिक अनुभव, सेवाकाल, कार्यकुशलता और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में दिए गए योगदान को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सेवारत शिक्षकों के अनुभव और उनकी अब तक की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा प्रभावित न हो और वे भयमुक्त वातावरण में अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
संसद में मुद्दा उठाने और अध्यादेश लाने की मांग
शिक्षक संगठनों ने सांसद संतोष पांडे से आग्रह किया कि सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता का विषय संसद में प्रमुखता से उठाया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से इस मामले में आवश्यक विधायी पहल करने की मांग करते हुए कहा कि संसद के माध्यम से अध्यादेश अथवा आवश्यक कानूनी प्रावधान लाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रभाव के संबंध में समाधान तलाशा जा सकता है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि केंद्र सरकार इस विषय पर प्रभावी पहल करती है, तो देशभर के लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बन सकती है।
नौकरी की चिंता के बीच शिक्षा की गुणवत्ता पर भी जताई चिंता
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को शिक्षा की गुणवत्ता से जोड़ते हुए कहा कि जब शिक्षक अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर आशंकित रहेंगे, तो उनके मानसिक तनाव का असर अध्यापन कार्य पर भी पड़ सकता है।
शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया कि नौकरी खोने की चिंता के बीच क्या शिक्षक पूरी एकाग्रता, शिद्दत और ईमानदारी के साथ विद्यार्थियों को पढ़ा पाएंगे? क्या भय और अनिश्चितता के माहौल में शिक्षा की गुणवत्ता के अपेक्षित लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं?
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना शिक्षा व्यवस्था के व्यापक हित में आवश्यक है। सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए शिक्षकों और उनके परिवारों के हित में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
सांसद संतोष पांडे ने गंभीरता से सुनीं बातें, केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात का आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद संतोष पांडे को TET की अनिवार्यता और सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से संबंधित विस्तृत दस्तावेज उपलब्ध कराए। सांसद ने शिक्षक संगठनों की बातों को गंभीरता से सुना। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इस दौरान सांसद का रुख सकारात्मक रहा।
सांसद संतोष पांडे ने इस विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी से शिक्षक प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने का आश्वासन भी दिया। शिक्षक संगठनों ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समक्ष विषय रखे जाने से सेवारत शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की दिशा में सार्थक पहल हो सकेगी।
संयुक्त प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारी रहे शामिल
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन एवं छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मुलाकात में दोनों संगठनों के प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए।
प्रतिनिधिमंडल में छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, प्रांतीय प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे, छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक मनीष मिश्रा, पी.आर. झाड़े जिला अध्यक्ष, रमेश कुमार साहू जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन राजनांदगांव, वीरेंद्र कुमार रंगारी सचिव शिक्षक फेडरेशन राजनांदगांव, ओमप्रकाश साहू जिला सचिव छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन राजनांदगांव, ललित प्रताप सिंह जिला उपाध्यक्ष, बंदीशनेम पांडे जिला महासचिव, अमीन कुरैशी जिला प्रवक्ता, सोनेश्री पाटिल जिला मीडिया प्रभारी, रोशन साहू ब्लॉक संयोजक राजनांदगांव, सूरज प्रसाद शर्मा ब्लॉक अध्यक्ष राजनांदगांव एवं डीसम प्रसाद तिवारी ब्लॉक सचिव राजनांदगांव उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त सुधांशु सिंह, उत्तम डडसेना, थंगेश्वर साहू, दुर्ग जिला अध्यक्ष चंचल कुमार द्विवेदी, दुर्ग जिला सचिव लक्ष्मीकांत तिवारी एवं पाटन उपाध्यक्ष हरिशंकर देवांगन सहित अन्य पदाधिकारी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।
सेवा सुरक्षा के समाधान की उम्मीद
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया कि सेवारत शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता का मुद्दा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, उनके परिवारों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान से जुड़ा हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार से मांग की कि शिक्षकों की वर्षों की सेवाओं और अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाए। सांसद संतोष पांडे द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मुलाकात कराने के आश्वासन के बाद शिक्षक संगठनों ने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा और सेवारत शिक्षकों को राहत दिलाने की दिशा में सकारात्मक पहल होगी।



