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रेलवे इन तीन चार्ज के नाम पर यात्रियों से जबरन वसूल रहा रकम

चुनावी माहौल में केंद्र की भाजपा सरकार और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है। अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरने की कोशिश कर रहे। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बार भारतीय रेलवे की अव्यवस्था, टिकट वसूली पर कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आज यात्रियों से फेक सुपरफास्ट सरचार्ज, डायनेमिक प्राइसिंग और 'स्पेशल' ट्रेनों का लंबा एक्सटेंशन के नाम से वसूली हो रही है।

कांग्रेस का आरोप है कि यदि हम साधारण और स्पेशल तरह के टिकटों को देखें, तो वसूली और भी अधिक स्पष्ट और धूर्तता से भरी हुई दिखती है। भारत के लोगों से जबरन वसूली के इतने सारे अलग-अलग तरीके खोजने के लिए हमें मोदी सरकार को श्रेय देना चाहिए। आज यात्रियों से फेक सुपरफास्ट सरचार्ज, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रियायत खत्म, डायनेमिक प्राइसिंग और 'स्पेशल' ट्रेनों का लंबा एक्सटेंशन के नाम से वसूली हो रही है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर विस्तार से समझाते हुए लिखा है कि रेलवे में टिकट वसूली का सबसे बड़ा साधन फेक 'सुपरफास्ट सरचार्ज' है। मूल रूप से इसे केवल प्रीमियम ट्रेनों पर लागू किया जाना था, लेकिन अब इसे मोदी सरकार द्वारा चुनी गई किसी भी ट्रेन सेवा पर लागू कर दिया जाता है। जयराम रमेश उदाहरण देते हुए बताया कि अक्तूबर 2022 में देश भर में 130 से अधिक साधारण मेल एक्सप्रेस ट्रेनों को 'सुपरफास्ट' के रूप में लेबल किया गया। यात्रियों को स्लीपर में भी हर रिजर्वेशन के लिए 180 रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है। जबकि ट्रेन की गति या गुणवत्ता में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ है। यहां तक कि सीएजी ने पाया कि 95 फीसदी तक 'सुपर फास्ट' टैग वाली ट्रेनें देरी से चलती हैं या करोड़ों रुपये सरचार्ज वसूलने के बावजूद सुपरफास्ट की गति नहीं पकड़ पाती हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि दूसरा कदम बिलकुल अमानवीय है। मोदी सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल टिकट में मिलने वाली रियायतें वापस ले लीं। वरिष्ठ नागरिक जो तीर्थयात्रा, अपने बच्चों से मिलने या चिकित्सा आदि के लिए ट्रेनों पर निर्भर होते हैं, उनसे अब अधिक कीमत वसूली जा रही हैं। इस पॉलिसी के बाद से तीन वर्षों में, वरिष्ठ नागरिकों से 3700 करोड़ रुपये वसूले गए हैं।

तीसरा, डायनेमिक प्राइसिंग शायद मोदी सरकार द्वारा लूट का सबसे स्पष्ट रूप है। अधिक डिमांड वाले मार्गों पर किराए में 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है, जिससे गरीब यात्रियों के लिए किराया वहन करना मुश्किल हो गया है। उदाहरण के लिए, 2013-2014 में मुंबई से पटना के लिए स्लीपर क्लास के टिकट की कीमत 533 रुपये थी। डायनेमिक प्राइसिंग के कारण त्योहारों के दौरान इसकी कीमत 2625 रुपये तक पहुंच गई। डायनेमिक प्राइसिंग के कारण कई बार तो रेलवे टिकटों की कीमत फ़्लाइट की टिकटों की कीमतों से भी अधिक होती हैं। जो प्रवासी श्रमिक छठ पूजा के लिए अपने परिवार के पास जाना चाहते हैं, या जो छात्र छुट्टियों के दौरान अपने परिवार से मिलना चाहते हैं, उन्हें अब भारत के रेलवे सिस्टम से बाहर कर दिया जा रहा है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चौथा कारण बताया कि टिकट का किराया बढ़ाने के लिए 'स्पेशल' ट्रेनों के टैग का दुरुपयोग किया जा रहा है। स्पेशल ट्रेनों को 6 महीने से 1 वर्ष के लिए चलाया जाना चाहिए, लेकिन विजयपुरा-मंगलुरु मार्ग के लिए चलायी जा रही ट्रेनों को तीन वर्षों से भी अधिक समय से 'स्पेशल' कहा जा रहा है, और यात्रियों से लगातार 50 फीसदी अधिक किराया वसूला जा रहा है।

रेलवे के किराए में बढ़ोत्तरी का ग्राफ

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि भारतीय रेलवे "प्रति यात्री, प्रति किलोमीटर के हिसाब से औसत कीमत" की रिपोर्ट करता है। वर्ष 2013-14 में यह 0.32 रुपया/यात्री-किलोमीटर था। वर्ष 2021-22 तक यह दोगुने से भी अधिक बढ़कर 0.66 रुपया/यात्री-किलोमीटर हो गया। इसमें करीब 107 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि हम इसकी तुलना वर्ष 2003-04 से वर्ष 2013-14 तक यूपीए के शासन काल से करते हैं, तो हमें कहीं अधिक उचित वृद्धि दिखाई देती है। यह सिर्फ 0.24 से 0.32 रुपये तक हुई थी। (33 फीसदी की वृद्धि)। कांग्रेस पार्टी रेलवे को भारत के समाज और अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में देखती है, न कि केवल वसूली के एक साधन के रूप में।

News Desk

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