छत्तीसगढ

कांग्रेस पार्टी सिमटी दुर्ग तक….दुर्ग जिले के तीन कांग्रेस नेताओं को मिला लोकसभा का टिकट…..कांग्रेस की नजर में बिलासपुर हुआ नेतृत्व विहीन….. ईडी के मामले में दोषी भिलाई विधायक को कांग्रेस ने बनाया बिलासपुर लोकसभा प्रत्याशी…..

●छत्तीसगढ़ उजाला रायपुर/दुर्ग/बिलासपुर●

छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस का वजूद समाप्त होता नजर आने लगा है।पांच साल की सत्ता करने के बाद कांग्रेस का इतना बुरा हाल भी होगा इसका अहसास भी नही था।पर प्रदेश की सत्ता से बाहर होते ही कांग्रेस पार्टी की वास्तविकता जगजाहिर हो गयी।प्रदेश कांग्रेस पार्टी का इतना बुरा काल पहले कभी नही रहा है।लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 11 सीट में प्रत्याशी तय करने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ रहा है।राजनैतिक गलियारों में भी इस बात की काफी चर्चा थी कि कांग्रेस को लोकल नेतृत्व चुनाव के लिए नही मिल पा रहा है।पर आज की वस्तुस्थिति भी यही बयां कर रही है।कांग्रेस पार्टी दुर्ग जिले तक ही सिमट कर रह गई है

…..बिलासपुर में कांग्रेस पार्टी को लोकल नेतृत्व नही मिला….जिस वजह से दुर्ग जिले से भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव को बिलासपुर लोकसभा का प्रत्याशी बनाकर उतारना पड़ा।देवेंद्र यादव के नाम पर सहमति बताकर कांग्रेस पार्टी ने यह बता दिया है कि बिलासपुर लोकसभा से उनके पास लोकल कोई भी नेतृत्व नही है जिसके नाम पर पार्टी हाईकमान को भरोसा हो?देवेंद्र यादव के नाम से ईडी ने मामला पंजीबद्ध किया हुआ है।ईडी व आईटी ने भी देवेन्द्र यादव के निवास में छापेमारी की थी।ईडी ने अपनी जाांच में भी देवेंद्र यादव पर आरोप लगाया है।

अपनी गिरफ्तारी न हो सके इसलिये इस नेता ने उच्च न्यायालय में (एन्टीसेपेट्री बेल) अग्रिम जमानत की अर्जी भी लगाई थी जो कि न्यायालय ने खारिज कर दी थी फिर ऐसे अपराधी को बिलासपुर लोकसभा से कांग्रेस ने किस लिए चुनावी मैदान में उतारा है।यह अपने आप मे समझ से परे है।बिलासपुर कांग्रेस से कोई भी नेता क्या लोकसभा चुनाव में उतरना नही चाहता था या फिर कांग्रेस पार्टी को बिलासपुर के कांग्रेस नेताओ पर भरोसा ही नही रहा।

दमदार नेताओ के नाम से पहचाने जाने वाला बिलासपुर संभाग आज कांग्रेस पार्टी के लिये नेतृत्व विहीन हो गया यह अपने आप मे सोचनीय प्रश्न है।कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले से जनता भी यह समझ चुकी है कि कांग्रेस ने आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर चुकी है।

बिलासपुर के कांग्रेस पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओ को इस विषय पर स्वयं विचार करने की आवश्यकता है।बिलासपुर संभाग शुरू से ही बड़े नेताओं से भरा पड़ा रहा।आज इस लोकसभा में कांग्रेस को बाहरी प्रत्याशी को उतारना पड़ गया।आज भी कांग्रेस के बड़े चेहरे है जिनमे राजेश पांडे,विजय पांडे,चिका बाजपेयी, राकेश शर्मा, राजू यादव, अशोक अग्रवाल, रामशरण यादव, महेश दुबे,अटल श्रीवास्तव, शैलेश पांडे जैसे कई नाम है।क्या इनके नाम लोकसभा के लिए तय नही हो सकते थे।कुल मिलाकर कांग्रेस को लोकल नेताओं पर जरा भी भरोसा नही रहा।कांग्रेस पार्टी के इस फैसले से कांग्रेस के अंदर अब विरोध की बाते भी सुनने में आने लगी है।

छत्तीसगढ़ की लोकसभा में कांग्रेस को केवल दुर्ग जिले से ही प्रत्याशी लेना तय कर लिया था।इसीलिए पूर्व मुख्यमंत्री और दुर्ग जिले के पाटन से विधायक भूपेश बघेल को कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश की राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू को बतौर कांग्रेस प्रत्याशी महासमुंद लोकसभा से चुनाव मैदान में उतारा गया है।भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव को बिलासपुर लोकसभा के लिए कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित किया गया।क्या जनता इन नेताओं को स्वीकार करेगी?ऐसे बहुत से सवाल अब राजनैतिक गलियारों में उठने लगे है।

एक व्यक्ति तभी नेतृत्व कर सकता है जब अन्य लोग उसे अपना नेता स्वीकार करें, और उसके पास केवल उतना ही अधिकार है जितना उसकी प्रजा उसे देती है।एक अपराधी आपके साथ न्याय नही कर सकता।यदि कोई उनकी बात ही नहीं सुनेगा तो दुनिया के सभी शानदार विचार आपके राज्य व आपको को नहीं बचा सकते।”

Anil Mishara

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