*बिलासपुर के भाईचारे पर पत्थर किसने फेंका?* *खपरगंज की हिंसा पर निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई जरूरी, लेकिन क्या आरोपियों के अवैध निर्माण पर भी चलेगा बुलडोजर?*
छत्तीसगढ़ उजाला

बिलासपुर (छत्तीसगढ़ उजाला)। न्यायधानी बिलासपुर अपनी सहजता, सामाजिक सौहार्द की संस्कृति के लिए जानी जाती रही है। यहां हिंदू-मुस्लिम समाज वर्षों से साथ रहते, कारोबार करते और एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते आए हैं। ऐसे शांत शहर में यदि किसी सोशल मीडिया टिप्पणी या निजी विवाद की चिंगारी भीड़, मारपीट और पथराव तक पहुंच जाए, तो सवाल केवल कानून-व्यवस्था का नहीं रह जाता—यह शहर के सामाजिक ताने-बाने की चिंता बन जाता है।
शुक्रवार देर रात खपरगंज क्षेत्र में दो पक्षों के बीच विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मारपीट के बाद खपरगंज के मुस्लिम मोहल्लों की ओर से पथराव हुआ और हालात नियंत्रित करने पहुंची पुलिस को भी निशाना बनाया गया। कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है और स्थिति संभालने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तथा आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है।बड़ी संख्या में मुस्लिमों के इकठ्ठा हो जाने के बाद पथराव किया गया।आखिर अचानक ऐसा प्रदर्शन करके कुछ अपराधी किस्म के मुस्लिम लड़कों के द्वारा यह किसके इशारे पर किया गया है इन सबकी जांच करवानी जरूरी है।
इस घटना को हिंदू बनाम मुस्लिम की स्थायी लड़ाई के रूप में प्रस्तुत करना भी उतना ही खतरनाक होगा जितना हिंसा करने वालों को उनके समुदाय के नाम पर बचाने की कोशिश करना। अपराध करने वाले की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए, धर्म से नहीं। जिसने पत्थर चलाया, हमला किया, अफवाह फैलाई या सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को भड़काया—साक्ष्य मिलने पर उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी समुदाय से हो।इस मामले में एक बात भी खुलकर सामने आ रही है कि पुलिस वाले भी इन दंगाइयों के सामने कमजोर नजर आ रहे थे।वही दूसरी ओर हिंदुओं को पकड़कर थाने में ले जाने की बात भी सामने आई है।
प्रशासन से शहर पूछ रहा है—कार्रवाई कितनी कठोर होगी?
कलेक्टर ने कहा है कि बिलासपुर की पहचान आपसी भाईचारे और सौहार्द से है और इसे खराब करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी ने भी स्पष्ट किया है कि मारपीट और पथराव की पूरी जांच की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
लेकिन जनता के सामने अब बड़ा सवाल है—क्या केवल एफआईआर और गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित रहेगी, या हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर कानून के तहत कठोर कदम उठाए जाएंगे?
क्या खपरगंज में चलेगा बुलडोजर?
घटना के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि आरोपियों से जुड़े निर्माण अवैध पाए जाते हैं तो क्या प्रशासन उनके खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई करेगा जैसी अन्य मामलों में अवैध निर्माण के विरुद्ध की जाती है?
यहां एक बात स्पष्ट रहनी चाहिए—बुलडोजर किसी अपराध की स्वतः सजा नहीं हो सकता। किसी मकान या दुकान पर कार्रवाई तभी होनी चाहिए जब वह निर्माण कानून के तहत अवैध पाया जाए और संबंधित व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया तथा नोटिस का अवसर दिया गया हो। हिंसा का जवाब कठोर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से मिलना चाहिए; अवैध निर्माण का फैसला नगर निगम और सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी नियमों के आधार पर करें।
इसलिए सवाल अधिक सटीक यह है—क्या प्रशासन खपरगंज हिंसा के आरोपियों से जुड़े संभावित अवैध निर्माणों की निष्पक्ष जांच करेगा और यदि अतिक्रमण या अवैध निर्माण प्रमाणित होता है तो बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा?
पत्थर किसी धर्म ने नहीं, उपद्रवियों ने चलाए
इस घटना के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी बिलासपुर के नागरिकों की भी है। कुछ लोगों के अपराध को पूरे हिंदू या मुस्लिम समाज से जोड़ देना उन हजारों परिवारों के साथ अन्याय होगा जो वर्षों से शांति से साथ रह रहे हैं।
प्रशासन को सीसीटीवी, मोबाइल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से एक-एक उपद्रवी की पहचान करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री डालने वालों से लेकर पथराव और हमले में शामिल लोगों तक, जिसकी जितनी भूमिका प्रमाणित हो, उस पर उतनी ही कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
बिलासपुर को नफरत नहीं, न्याय चाहिए। ऐसी कार्रवाई चाहिए जिससे संदेश साफ जाए कि इस शहर में धर्म के नाम पर हिंसा करने, अफवाह फैलाने और पुलिस पर हमला करने की छूट किसी को नहीं है। साथ ही कार्रवाई ऐसी हो जो अदालत और कानून की कसौटी पर भी खरी उतरे।बिलासपुर का भाईचारा किसी मुट्ठीभर उपद्रवियों से कमजोर नहीं पड़ना चाहिए। दंगाई का कोई धर्म नहीं होता और कानून का भी कोई धर्म नहीं होना चाहिए।अब इस मामले कितने दंगाइयों की गिरफ्तारी पुलिस प्रशासन करता है यह देखना बाकी है।



