*एम.यू कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी और प्रो. के. बालराजु ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन*
छत्तीसगढ़ उजाला

उजाला डेस्क:-
डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र (मुंबई विश्वविद्यालय) और डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में 14 अगस्त को मुंबई विश्वविद्यालय के नेशनल सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी ऑडिटोरियम में “डॉ. अंबेडकर और कृषि में उनका योगदान” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र डी. कुलकर्णी ने की। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के समाज कार्य संस्थान के निदेशक प्रो. के. बालराजु कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संगोष्ठी की शुरुआत में मुंबई विश्वविद्यालय के डॉ. अंबेडकर पीठ के निदेशक प्रो. वाल्मीकि के. सरवाड़े ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और स्वागत भाषण दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. के. बालराजु ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा, “भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर ब्रिटिश भारत के पहले ऐसे विधायक थे, जिन्होंने मध्यस्थ जमींदारी प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक विधेयक पेश किया था।” उन्होंने आगे कहा कि बाबासाहेब ने किसानों और राज्य के बीच सीधा कर संबंध स्थापित करने तथा बिचौलियों के पूर्ण उन्मूलन के लिए निरंतर संघर्ष किया। इसके अलावा, प्रो. बालराजु ने उल्लेख किया कि डॉ. अंबेडकर ने ग्रामीण भारत में अतिरिक्त कृषि कार्यबल (surplus workforce) की गंभीर समस्या के समाधान के लिए राज्य के नेतृत्व में औद्योगीकरण का ठोस सुझाव दिया था।
कार्यक्रम का मुख्य भाषण प्रसिद्ध विद्वान प्रो. आशीषकुमार जनक राय दवे द्वारा दिया गया। महाराष्ट्र कृषि मूल्य आयोग के सदस्य प्रो. परशराम पाटिल ने भी संगोष्ठी के दौरान कृषि नीतियों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों, शिक्षाविदों और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय से संबंधित अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।




