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IPS राहुल बंसल पर 1 करोड़ की रिश्वत के आरोप: वायरल ऑडियो के बाद ASI और कॉन्स्टेबल लाइन अटैच, CBI कोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई

अंबिकापुर(छत्तीसगढ़ उजाला)-सरगुजा में साइबर ठगी के एक मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों पर लगे एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मामले में वायरल ऑडियो सामने आने के बाद ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई सरगुजा IG दीपक कुमार झा के निर्देश पर की गई है।

मामले में अंबिकापुर CSP एवं ट्रेनी IPS राहुल बंसल पर भी एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, पुलिस विभाग का कहना है कि राहुल बंसल के खिलाफ अब तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। मामला फिलहाल CBI की स्पेशल कोर्ट में विचाराधीन है और लगाए गए सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।

हरियाणा निवासी आकाश कुमार ने इस पूरे मामले को लेकर CBI से शिकायत की थी। FIR दर्ज नहीं होने के बाद उन्होंने दिल्ली स्थित CBI स्पेशल कोर्ट में परिवाद दाखिल किया। कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया है और अब 18 अगस्त को अगली सुनवाई होनी है।

परिवाद में ट्रेनी IPS राहुल बंसल, ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7A तथा BNS की धाराओं 308 और 351 के तहत FIR दर्ज करने की मांग की गई है। शिकायत के साथ शपथ-पत्र, व्हाट्सऐप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग भी पेश किए जाने की बात कही गई है।

मामले में छत्तीसगढ़ के DGP को भी नोटिस जारी होने की जानकारी सामने आई है।

शिकायतकर्ता आकाश कुमार का आरोप है कि साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान अंबिकापुर CSP राहुल बंसल की ओर से दबाव बनाया गया और कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की रिश्वत की मांग की गई।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस कथित लेन-देन में साइबर सेल में पदस्थ ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा ने बिचौलियों की भूमिका निभाई।

आरोप के मुताबिक रकम हवाला के जरिए दो किश्तों में 50-50 लाख रुपये पहुंचाने की बात कही गई। वहीं आरक्षक अंशुल शर्मा से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस विभाग ने दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनका अंतिम निर्धारण अदालत में होना बाकी है।

सरगुजा IG दीपक कुमार झा के मुताबिक अंबिकापुर साइबर रेंज थाना में दर्ज साइबर ठगी के मामले की जांच CSP राहुल बंसल के नेतृत्व में की जा रही थी। इस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों से अब तक 23 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

IG के अनुसार जांच के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से CBI में शिकायत की गई थी। पुलिस ने शिकायत के संबंध में अपना जवाब भी प्रस्तुत किया है।

पुलिस का कहना है कि एक करोड़ रुपये के कथित लेन-देन को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष से सबूत पेश करने को कहा गया, लेकिन अब तक CSP राहुल बंसल के खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।

वहीं वायरल ऑडियो को लेकर ASI और आरक्षक के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई है।

यह पूरा विवाद जिस साइबर ठगी के मामले से जुड़ा है, उसमें अंबिकापुर के क्रशर संचालक रवि मोहन गोस्वामी ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के मुताबिक शेयर मार्केट में ट्रेडिंग के नाम पर उन्हें ‘मनी ट्रेड 365’ और ‘स्काई ट्रेड’ नाम के एप्लीकेशन इंस्टॉल करवाए गए। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने के नाम पर उनसे करीब 20 लाख 15 हजार रुपये की ठगी की गई।

बताया गया कि यह राशि 17-18 अलग-अलग बैंक खातों में 84 किश्तों के जरिए जमा कराई गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने BNS की धारा 318(4), 3(5) और IT एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया।

इस केस की जांच CSP राहुल बंसल के नेतृत्व में की जा रही थी।

पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी के इस मामले में अब तक 23 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसी जांच के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि मामले में जल्द चालान पेश करने और जांच रिपोर्ट में कथित राहत देने के बदले एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई।

आरोप है कि रकम हवाला के जरिए लेने की बात हुई। इसके अलावा कथित तौर पर मोबाइल दुकान पर रकम छोड़ने के लिए कहे जाने से जुड़ा ऑडियो भी सामने आया है।

इसी वायरल ऑडियो ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

फिलहाल मामला दो स्तरों पर आगे बढ़ रहा है। एक ओर वायरल ऑडियो के आधार पर ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को पुलिस लाइन अटैच किया गया है, वहीं दूसरी ओर एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों को लेकर CBI स्पेशल कोर्ट में परिवाद लंबित है।

18 अगस्त को होने वाली सुनवाई में कोर्ट मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर दिशा तय कर सकता है।

सबसे अहम बात यह है कि राहुल बंसल पर लगाए गए रिश्वत के आरोप अभी आरोप मात्र हैं। पुलिस विभाग ने उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिलने की बात कही है और मामले की अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

प्रशांत गौतम

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